Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- २४ " वादा "

                   भाग :- २४

गतांक से आगे 👇

" यह सच है कि उसे भूलना आसान नहीं
   फिर    भी    उसे     भूला     दूंगी     मैं
   जाने से पहले एक वादा  निभा दूंगी मैं
   उसे  अपने  दिल  से  निकाल  दूंगी  मैं "

कहते हुए अरण्या की ऑंखो में ऑंसूओ की नमी दिखने लगी जिसे उसने अपने ऑंखो में छुपाने की भरसक कोशिश की और इसमें उसे कामयाबी ‌मिल भी गई लेकिन तब तक शिविका ने ‌उस नमी को ‌देख भी लिया था और ‌समझ भी ली थी

' नही अरू , मैं तुम्हारे प्यार को इस तरह तुमसे जुदा नहीं होने दूंगी मैं तुम्हारे प्यार को मंजिल तक जरूर पहुॅंचा कर रहूंगी ।'  शिविका ने अरण्या की तरफ देखते हुए कहा

' वही तों मैं भी चाहती हूॅं शिबू ! मेरे दिल को सुकून तभी मिलेगा जब मेरा प्यार अपनी मंजिल पा लें और इसमें तुम्हें मेरी मदद करनी होगी । बोलो शिबू ! मेरी मदद करोगी ना ?।'     अरण्या ने  शिविका का हाथ पकड़ कर कहा

' तेरी मदद के लिए मेरी जान तक  हाजिर  है मेरी बहन बस तुम कहो मुझे करना क्या है ? मैं तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार हूॅं ।'
शिविका ने अरण्या के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा

' मैं जानती हूॅं , मेरी बहन के लिए मेरी खुशी क्या मायने रखती है ? मुझे डाॅक्टर बनाने के लिए ऐसा काम तुमने मुझसे करवाया जिसे सिर्फ और सिर्फ तुम्हें ही करना था ।'    अरण्या ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा ‌।

' मैंने क्या करवा दिया तुमसे जो सिर्फ और सिर्फ मुझे ही करना था ?'      शिविका ने अनजान बनते हुए कहा

' तुमने मेरे आत्मसम्मान को बिना ठेस पहुॅंचाए मेरी मदद की है मेरी बहन इस बात को समझने में मुझे थोड़ी देर लगी लेकिन मेरी मोटी बुद्धि में यह बात गई कि यह सब तुमने मेरी सहायता करने के लिए किया तुम जानती थी कि मैं सीधे - सीधे  तुमसे पैसे नहीं लुंगी और यही वजह थी कि तुमने मेरी सहायता मुझसे अपना काम करवा कर की ।'  अरण्या ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा

' अरण्या ! ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम सोच रही हों मुझे उस डेट पर नहीं जाना था इसलिए मैंने तुम्हें भेज दिया ।'      शिविका ने नजरें नीची करते हुए कहा

' जिन लोगों को  झूठ बोलना नहीं आता उसे बोलने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए और ऐसे लोगों में तुम भी शामिल हों शिबू । तुमने जो मेरे लिए किया वह किसी और ने आज तक नही किया । मेरे खुद के रिश्तेदारों ने मिलकर जितनी मदद नहीं की उतनी तुमने  अकेले ही कर दी । इस अहसान का कर्ज मैं कभी नहीं चुका पाऊंगी , जिंदगी भर मैं तुम्हारी शुक्रगुजार रहूंगी । कल को मैं डाॅक्टर बन जाती हूॅं तों तुम्हारा योगदान सर्वोपरि होगा ।'   कहते - कहते अरण्या भावुक हो गई ।

अरण्या की ऑंखो में ऑंसू देखकर शिविका ने उसे तुरंत ही टोका और कहा :- " तुझे आज क्या हो गया है बहन  ?   पहले तो ऐसी भावुक  बातें  कभी नहीं की और यह रोना - धोना बंद कर नहीं तों मुझे भी रोना आ जाएगा ।"

दोनों दोस्त अरण्या और शिविका  एक-दूसरे को देख मुस्कुरा पड़ते हैं ।

' शिबू !  तुम आज अगर मेरे घर पर नही आती तों मैं खुद तुमसे मिलने आ जाती । मुझे तुमसे  बहुत जरूरी बात करनी है और यह बात हमारे और तुम्हारे बीच ही रहनी चाहिए । किसी तीसरे को इसकी भनक तक नहीं होनी चाहिए ।'        अरण्या ने कहा ।

' पहेलियां मत बुझा अरु ! जो भी बात है बता दें ।' शिविका ने कहा ।

' मुझसे वादा करों कि तुम यह बात किसी को नहीं बताओगी । हमारे बीच की बातें हम दोनों के दरम्यान ही रहेगी ।'    अरण्या ने कहा ।

' मैं वादा करती हूॅं कि हमारे दरम्यान  हुए किसी भी बात की खबर किसी तीसरे को बिल्कुल भी नहीं होगी । वैसे बता दें कि तुम्हें और सुजाॅय को एक करने में मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकती हूॅं । वैसे मुझे ऐसा लग रहा है कि जिस बात के लिए मुझसे वादा लिया जा रहा है वह सुजाॅय से ही संबंधित है । मैं सही कह रही हूॅं ना ?'     शिविका ने मुस्कुरा कर कहा ।

' मेरी बहन कभी  गलत  हो  ही नहीं  सकती । तुमने बिल्कुल सही कहा कि  हम दोनों अभी जिस विषय पर  बात  करने  वाले  हैं  उसके  केंद्रबिंदु में  सुजाॅय ही  है  ।'      अरण्या ने कहा ।  

थोड़ा रूककर भरपूर सांस ले अरण्या ने फिर से कहना शुरू किया :- " मैं अपनी बातों को गोल - गोल नहीं घुमाते हुए साफ - साफ कहना चाहती हूॅं कि तुम सुजाॅय से शादी कर लो । वह बहुत अच्छा लड़का है और मैं चाहती हूॅं कि तुम दोनों एक हो जाओ  "।

शिविका आश्चर्य से अरण्या को देखने लगती है ।

' यह मत समझना कि मैं तुमसे मजाक कर रही हूॅं । जहाॅं तक बात तुम्हारी और सुजाॅय की है , मैं मजाक करने की सपने में भी सोच नहीं सकती । तुम दोनों ही  मेरे लिए खास हों । तुम मेरा दिल हो तो सुजाॅय मेरी धड़कन बन चुका है । तुम दोनों के बिना मेरा जीना नामुमकिन  है । मैंने अगर तुम दोनों में से किसी एक को भी खो दिया तों मैं अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगी । तुम मुझसे वादा करों मेरी बहन कि तुम सुजाॅय की जीवनसंगिनी बन हर कदम  पर उसका साथ दोगी । उसके जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आओगी । अपने प्यार से सुजाॅय का दिल जीतोगी .....

अरण्या आगे के शब्द बोल पाती उससे पहले ही शिविका ने कहा :- " अपने प्यार से उस सुजाॅय का दिल जीतने के लिए तुम मुझे कह रही हों जिसमें सिर्फ तुम हो " ।

' हाॅं ! जरूरी नहीं कि प्यार सिर्फ एक बार ही हो । सुजाॅय  के मन में अभी जों मेरे लिए जज़्बात है , जिसे वह अभी  प्यार समझ रहा  है । ऐसा भी तों हो सकता है कि  वह महज सिर्फ एक आकर्षक हो  । मेरे रूप और शरीर को पाने  के लिए ही वह मेरे करीब आना चाहता हो ।'   अरण्या ने कहा ।

' ऐसा बिल्कुल भी नहीं है । मैंने उसकी ऑंखो में तुम्हारे लिए प्यार देखा है और यह प्यार शरीर का आकर्षण नहीं वरन्  मन का प्रेम है जो किसी भी आकर्षण से बड़ा है । सुजाॅय तुम्हें मन से प्यार करता है अरू ।'       शिविका ने अरण्या को समझाते हुए कहा ।

' मान लिया शिबू कि वह मुझे आत्मा की गहराइयों से प्यार करता है । मैं उससे शादी कर लूंगी  लेकिन  तब‌ जब वह अपने डैडी के खिलाफ जाकर मेरा हाथ थाम लें । उसके डैडी मुझ जैसी गरीब लड़की को अपने घर की बहू कभी नहीं बनने देंगे । वह कभी नहीं चाहेंगे कि सड़क की कीचड़ उनके घर तक पहुॅंचे । सुजाॅय के डैडी जैसे रईस लोग हम जैसे गरीब लोग को सड़क की कीचड़ की तरह ही सम्मान देते हैं  लेकिन फिर भी अगर  सुजाॅय ने मेरा हाथ थाम लिया और मेरे साथ खड़ा रहा तो मैं उससे शादी करने के लिए तैयार हूॅं लेकिन अगर वह  मेरा साथ नही देकर अपने डैडी के साथ खड़ा रहा तो मुझसे वादा करों कि तुम उससे शादी करोगी ।' अरण्या ने शिविका से कहा ।

' मुझे यकीन है सुजाॅय को जब मालूम पड़ेगा कि तुम उससे प्यार करती हो तों वह सारी शर्त , सारे बंधनों को तोड़ दौड़ा हुआ  सिर्फ तुम्हारे पास आएगा । अभी उसे तो यही लग रहा है कि तुम उससे प्यार नहीं करती इसलिए वह पीछे हट रहा है लेकिन जैसे ही उसे तुम्हारे प्यार का पता चलेगा वह अपने डैडी से लड़कर तुम्हारे पास आएगा और अगर वह खुद से ऐसा नहीं कर पाया तों मैं उसका साथ दूंगी और उसे तुम्हारे पास लेकर आऊंगी क्योंकि मेरे लिए भी तुम्हारी खुशी अपनी खुशी से बढ़कर है ।'   शिविका ने अरण्या की तरफ देखते हुए कहा ।

' अगर ऐसा नहीं हुआ तों तुम सुजाॅय से शादी करने के लिए तैयार हो ना ?'   अरण्या ने शिविका से पूछा ।

' इसकी नौबत ही नहीं आएंगी और किसी कारणवश , जिसकी संभावना ना के बराबर है  अगर ऐसी नौबत आ गई तो मैं उससे शादी करने के लिए तैयार हूॅं ।'   शिविका ने कहा ।

' वादा  मेरी बहन ? ।'  यह कहते हुए अरण्या ने शिविका की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ।

'  वादा ।'   कहते हुए शिविका ने अरण्या के बढ़ाएं हुए हाथ को पकड़ लिया ।

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓 

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7 Comments

Ammar khan

30-Nov-2021 11:35 AM

Nice

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✍️✍️

20-Sep-2021 07:06 PM

बहुत अजीब होते है दिल के जज्बात.. कभी दूर कोई तो की दिल के पास.... बहुत अच्छी कहानी..

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Harsh jain

15-Sep-2021 06:28 PM

बेहतरीन कहानी

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