Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- २३ " इकरार प्यार का "

                            भाग :- २३ " इकरार प्यार का "

गतांक से आगे 👇

' हमारी दुनिया में एक  तरफ ऐसे लोग हैं जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लड़ रहे हैं , अपने सपनों को पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं , उनके लिए जों असंभव है उसे संभव करने की कोशिश कर रहे हैं और इसका जीता-जागता उदाहरण हूॅं मैं । मुझे भी अपनी जिंदगी में कम कठिनाइयों से जूझना नही पड़ा है वहीं पर  दूसरी तरफ वो लोग हैं जिन्हे सभी सुविधाएं मुहैया हैं , उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के पीछे भागना नहीं पड़ता , उनके लिए कुछ भी असंभव नही है उसका उदाहरण है सुजाॅय ।  हम कह सकते हैं कि एक तरफ आसमान छूती इमारत है  तो दूसरी तरफ  झुग्गी झोपड़ी । अच्छे और मॅंहगे कपड़ों  में सुजाॅय दिखता है तों अपने तन को मामूली कपड़ों से  ढंकती  अरण्या । वैसी अरण्या जिसे डेट पर जाने के लिए तुमने ही महंगे कपड़े खरीद कर दिए । ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि अरण्या के पास कपड़े नहीं थे । थें ... लेकिन वह सुजाॅय के स्टैंडर्ड के नही थें ।'      अरण्या ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा ।

' तू कहना क्या चाहती है अरू ?'  शिविका ने अरण्या से पूछा ।

' मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूॅं कि मेरे और सुजाॅय के बीच ऊॅंच - नीच और अमीरी-गरीबी की ऐसी खाई है जिसे मैं भर नही सकती क्योंकि यह खाई सदियों से हमारे जैसे लोगों  और सुजाॅय जैसे लोगों के बीच में चलती आ रही है जिसे कोई भी आज तक पाट नहीं पाया है अपितु इसकी लपेट में आकर  जिंदगियां ही तबाह हुई है । इन अमीरों की दुनिया  बहुत अजीब है मेरी बहन । यह कहते कुछ और है और करते कुछ और है । इन्हें अपने स्टैंडर्ड से कोई समझौता नहीं करना हैं ।'   अरण्या ने मायूसी भरें शब्दों में कहा ।

' तू यह सब दिमाग से कह रही है । प्यार  एक ऐसा  एहसास है  जो दिमाग से नहीं दिल से होता है । प्यार  अनेक भावनाओं का ऐसा  समाहित अंश है  जिनमें अलग - अलग विचारो का समावेश होता है । प्यार हमें  स्नेह से लेकर खुशी की ओर धीरे - धीरे अग्रसर करता है। ये एक मज़बूत आकर्षण और निजी जुड़ाव की भावना है  जो सब  कुछ भूलकर उसके  साथ जाने को प्रेरित करता है। यही प्यार भरी प्रेरणा  तुम्हें अपने अंदर जगानी होगी । तुम और  सुजाॅय दोनों  मिलकर  ही इस अमीरी-गरीबी की खाई को अपने प्यार से  पाट सकते हों ।'   शिविका ने अरण्या की तरफ देखते हुए कहा।

' वह अपने डैडी के खिलाफ नहीं जा सकता । वह एक ऐसे शर्त से बंधा हुआ है जिसकी मंजिल तुम हो । जिस रास्ते पर वह चल रहा है वह रास्ता सिर्फ तुम तक जाती है । वह ना तो यू टर्न लेकर वापस लौट सकता है और ना ही किसी और रास्ते पर जाने की उसे इजाजत है ।'   अरण्या ने कहा ।

' मंजिल , रास्ता , यू टर्न । यह सब क्या है अरु ?  अभी भी मैं तुम्हारी बातों को समझ नहीं पा रही हूॅं और कौन सी ऐसी शर्त है जों सुजाॅय अपने डैडी के खिलाफ नहीं जा सकता ?'  शिविका ने अरण्या से पूछा ।

' अपने दोस्त की जान बचाने के लिए सुजाॅय ने अपनी जिंदगी ही शर्त पर कुर्बान कर दी । उसके पिता के लिए  अपने बेटे की खुशी से बढ़कर  उनका बिजनेस और मान- सम्मान है । सुजाॅय तों ऐसा लड़का है शिबू कि अपनी दोस्ती निभाने के लिए उसने उस पिता के सामने झुकना कबूल कर लिया  जिसने उसकी खुशियां ही उससे छीन ली थी । अपनी माॅं को वह अपने पिता के ज़ुल्म से बचा नहीं पाया और एक दिन ऐसा भी आया जब उसकी माॅं को रोज - रोज के जुल्मों - सितम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई । उसके पिता ने उसकी खुशियां छीन ली और उसे गले लगाने के बजाय उसे घर के एक कोने में रहने के लिए मजबूर कर दिया और खुद अपनी पत्नी की तेरहवीं के दिन ही  दूसरी शादी कर ली । वह  ऐशो-आराम की जिंदगी जीते रहे और सुजाॅय घुट - घुट कर जीता रहा ।एक दिन सुजाॅय की घुटन ने उसे घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया लेकिन कहते हैं ना कि व्यक्ति को अपने कर्मों का हिसाब यही पर चुकाना पड़ता है । शादी के पाॅंच साल बाद भी  सुजाॅय के पिता ने दूसरी शादी से जब  अपनी औलाद का मुख नहीं देखा तब जाकर उन्हें अपने बेटे सुजाॅय की याद आई। वह उसे घर वापस लौट कर आने के लिए कहने लगे लेकिन अपने इरादे के पक्के सुजाॅय को गरीबी में रहना मंजूर था लेकिन अपने आत्मसम्मान को बेचकर अमीरी के गद्दे पर सोना नामंजूर था । नियति भी कभी - कभी हम इंसानों को  ‌ऐसे रास्ते पर लाकर खड़ी कर देती है जिनमें से हमें ऐसा रास्ता चुनना पड़ता है जिसकी कल्पना तक हमने नहीं की रहती हैं । ऐसा ही सुजाॅय के साथ हुआ । उसके जिगरी दोस्त मनोज पर काॅलेज के कुछ विद्यार्थियों ने जानलेवा हमला कर दिया जिसमें उसकी जान जाने ही वाली थी कि सुजाॅय ने अपने आत्मसम्मान को अपने पिता के हाथों  बेचकर अपने दोस्त की जान  को बचा लिया ।'  अरण्या ने कहा ।

शिविका कुछ देर पहले कही अरण्या की बातों को समझने की कोशिश कर ही रही होती है कि अरण्या ने फिर से कहना शुरू किया :- " सुजाॅय की यही अच्छाई जब मेरे सामने उसके दोस्त मनोज द्वारा  खुलकर आई तों मैं अपने आप को उससे प्यार करने से रोक नहीं पाई । मुझे ऐसे इंसान से प्यार हो गया जो अपनी खुशी से बढ़कर दूसरों की खुशी समझता हो । जिसने अपने आने वाली जिंदगी की परवाह नहीं करते हुए अपने दोस्त की जिंदगी चाही और इसे बचाने के लिए उस आदमी के सामने झुका जिसने उससे उसकी खुशियां छीनी थी ।  जानती हूॅं शिबू ! तुम जान गई हो कि मैं सुजाॅय से प्यार करने लगी हूॅं और यह बात तुम मेरे मुॅंह से सुनना चाहती थी इसलिए इतनी सुबह-सुबह तुम मेरे घर पर आई हो ।'  अरण्या ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा ।

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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4 Comments

Chirag chirag

02-Dec-2021 09:20 PM

Very nyce

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✍️✍️

20-Sep-2021 07:01 PM

शानदार..कहानी

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Seema Priyadarshini sahay

14-Sep-2021 09:49 PM

बहुत ही खूबसूरत भाग है मैम। बहुत ही अच्छी कहानी है मैम

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