Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- २२ " प्यार के पैमाने "

                     भाग :- २२ " प्यार के पैमाने " 


गतांक से आगे 👇


जब तक हम किसी के पैमाने पर खड़े उतरते रहते हैं तब तक तों जिंदगी अच्छी चलती रहती है लेकिन जैसे ही हम उनके मन के विरुद्ध  कुछ कर लेते हैं या करने की कोशिश करते हैं यह प्यार का पैमाना सिकुड़ने लगता है मेरे डैडी ने बचपन से ही मुझे अपने प्यार के पैमाने में जकड़ कर रखा उन्होंने जों कहा मैंने किया लेकिन जब एक दिन मैंने अपने दिल का कर इंजीनियरिंग में जाने का निश्चय किया उन्होंने अपने प्यार के पैमाने को ऐसा सिकुड़ लिया कि मुझे अपने घर और दिल दोनों से ही दूर कर दिया एक दिन मेरी मजबूरी मुझे उनके घर के दरवाजे तक खींच लाई और उन्होंने दुनिया को दिखाने के लिए ही सही पर अपने प्यार के पैमाने को मुझ जैसे नालायक बेटे पर लुटाया लेकिन वो भी एक शर्त के साथ यह शर्त भी ऐसी है जिसमें मुझे सारी जिंदगी इन्हीं के साथ रहना पड़ेगा और वो भी इनकी मर्जी के साथ
बचपन से लेकर आज तक इनकी मर्जी ही तों चलती आई है इस घर में भी और साथ ही  मेरी जिंदगी में भी । ऐसे में मेरी मर्जी इस घर में , उनकी जिंदगी में और यहाॅं तक कि अपनी जिंदगी में भी कहाॅं चलने वाली ?    सुजाॅय ने अपने जिगरी दोस्त  मनोज की तरफ देखते हुए कहा

मनोज ने अपने दोस्त सुजाॅय की ऑंखो में ऑंसू देखें जों उसके दिल के पीड़ा की  गहराई को बयां कर रहे थे मनोज अपने दोस्त की पीड़ा उसकी ऑंखो से बहते हुए देखता रहा जों एक निर्झर नदी की भांति बहता ही चला जा रहा था , स्थिर होने का नाम ही नहीं लें रहा था

' अच्छा ही है भाई कि अरण्या मुझसे प्यार नहीं करती । अगर करती तो मैं अपने प्यार का साथ नहीं दें पाता , डैडी का विरोध कर अपने प्यार के साथ खड़ा नहीं हों पाता ऐसे में उसका  दिल टूटना निश्चित था  और दिल  टूटने पर कैसा महसूस होता हैं यह मुझसे बेहतर कौन समझ सकता है ?'    सुजाॅय ने मनोज के सामने  अपने जज़्बात के साथ - साथ उस  सच्चाई को भी बयां किया जिसे वह कबसे अपने दिल में रखें हुए था ।

दिल के जज्बातों  की नदी में डुबकी लगा जब व्यक्ति साँस लेने बाहर निकलता हैं तब बाहरी और आंतरिक अंतर को पूर्ण बढ़ता अथवा घटता देख किसी  एक जगह गिरता है  फिर उठता है और  पुनः बहने लग जाता हैं ठीक  वैसी ही स्थिति सुजाॅय की  इस समय थी जिसका गवाह उसका जिगरी दोस्त मनोज था ।

जज्बातों की नदी तों अरण्या और शिविका के बीच भी चलायमान थी जो उनकी बातों में निरंत बहती ही जा रही थी साथ ही दोनों अपने जज्बातों को नया रूप देने के लिए तैयार भी थी

' मेरी एक बात मानोगी शिबू ?'  अरण्या ने शिविका का हाथ पकड़ते हुए कहा

' कहकर तों देख बहन ! तेरे लिए तों जान भी हाजिर है ।'        शिविका ने कहा

शिविका का अपने प्रति प्यार और विश्वास देखकर अरण्या भावविभोर हो गई उसने मुस्कुराते हुए कहा :- " मेरी बहन ! मुझे तेरी जान अपनी जान से भी ज्यादा प्यारी है इसलिए यह मुझे नहीं चाहिए बल्कि मैं तों तुमसे  सिर्फ एक वादा चाहती हूॅं जिसे सिर्फ और सिर्फ तुम ही पूरा कर सकती हों ।' 
अरण्या ने भर्राए स्वर में कहा

' ऐसी क्या बात है जो सिर्फ मैं ही कर सकती हूॅं तुम नहीं ?'  शिविका ने कहा

' हाॅं मेरी बहन ! यह काम सिर्फ तुम ही कर सकती हों और इसे तुम्हें ही करना होगा ना तों इसे कोई और लड़की ही कर सकती है और ना ही मैं'
अरण्या ने कहा

' पहेलियां मत बुझाओ अरू ! जों भी कहना है खुलकर कहो'         शिविका ने कहा

' तुम सुजाॅय से शादी कर लो वह ऐसा लड़का है जिसे तुम्हारे पहचान बनाने से कोई दिक्कत नहीं होगी और वह तुम्हारा साथ भी देगा'   अरण्या ने कहा

' मैं उससे शादी नहीं करना चाहती । तुम तो जानती ही हो कि मैं क्या चाहती हूॅं फिर भी तुम कह रही हों कि मैं उससे शादी कर लूं । ऐसा भी नहीं कि वह मुझे प्यार करता है , वह तो ......' शिविका आगे भी कुछ करना चाहती थी लेकिन अरण्या को देख कर वह कहते - कहते रूक गई

' इतने अच्छे लड़के को तुम इस तरह मना मत करो शिबू जिससे भी उसकी शादी होगी वह बहुत खुशनसीब लड़की होगी और मैं वह लड़की नही हूॅं यह मैं अच्छी तरह जानती हूॅं ।' अरण्या ने भर्राए स्वर में कहा

अरण्या के भर्राए शब्दों की सत्यता को जानना शिविका के लिए जरूरी हों गया था तभी तों उसे अरण्या के सुजाॅय के प्रति उसके दिल में दबे जज़्बातों का पता चलता 

अरण्या के दिल के जज़्बात को जानने के उद्देश्य से शिविका ने अरण्या से कहा :-  " वह खुशनसीब लड़की तुम क्यों नही बन जाती बहन ?"

' मैं .... नही शिबू मेरी ऐसी किस्मत कहाॅं कि मैं सुजाॅय जैसे लड़के की दुल्हन बनूं इतने बड़े घर की बहू बनना मेरे नसीब में कहाॅं ?'    अरण्या ने कहा

' तुम एक बार कह दो कि तुम्हें भी सुजाॅय से प्यार है यकीन करों अरू ! मैं तुम दोनों की शादी करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगी ।'  शिविका ने कहा

' आज तुमसे मैं अपने दिल की बात कहने जा रही हूॅं जिसे मैंने आज से पहले अपने  आप से भी छुपाया है इस राज को मैं ना तों तुमसे ही छुपा सकती हूॅं और ना ही अपने आप से ही आज इसे बाहर आकर सच का सामना करना ही होगा कब तक मैं अपने ही सवालों और जवाबों से भागती रहूंगी ? आज नही तो कल मुझे इस सच्चाई का सामना तों करना ही था तों तुम्हारे सामने आज ही क्यों नहीं ?' आज मैं अपने जज्बातों को तुम्हारे सामने खोलकर रख दूंगी उसके बाद तुम्हें ही निर्णय लेना होगा कि मुझे आगे क्या करना चाहिए ?'  अरण्या ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

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5 Comments

Chirag chirag

02-Dec-2021 09:20 PM

Nice part

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Ammar khan

30-Nov-2021 11:34 AM

Good

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✍️✍️

20-Sep-2021 01:37 PM

बहुत अच्छी कहानी...आखिर अरण्या के मन की बात जुबा पर आ ही गयी।देखते है वह शिविका से क्या कहती है

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