Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- २०" एक कोशिश सच्चाई तक पहुॅंचने की " "

          भाग :- २० " एक कोशिश सच्चाई तक पहुॅंचने की " 


एक  छोटा - सा प्रयास ही अपने आप में सफलता प्राप्त करने का मार्ग होता हैं यही सोच शिविका को अरण्या के पास खींच लाई थी

' शिबू ! तुम इतनी सुबह-सुबह  वह भी मेरे घर पर सब ठीक तों है ?        अरण्या ने आश्चर्य से शिविका को अपने घर के दरवाजे पर खड़े देखकर कहा

' अंदर तो आने दें बहन ! बैठकर तसल्ली से बातें करते है ।'   शिविका ने मुस्कुराते हुए कहा

' हाॅं - हाॅं ... मैं तो इतनी सुबह-सुबह तुम्हें देख कर घबरा गई थी आज से पहले तुम इतनी सुबह मेरे घर नहीं आई थी ना इसलिए थोड़ा घबरा गई थी ।' अरण्या ने शिविका को घर के अंदर बुलाते हुए कहा।

' आंटी जी नही है ।'    शिविका ने अरण्या से पूछा

' वो कल गाॅंव से चाचा जी का फोन आया था इसलिए माॅं को जल्द ही निकलना पड़ा ।' अरण्या ने कहा

' सब ठीक तों है ।'  शिविका ने फिर से पूछा

' सब ठीक है बहन , मैं जा रही हूॅं तो माॅं को गाॅंव में ही शिफ्ट करना पड़ेगा इसलिए चाचा जी ने घर की साफ-सफाई करवाने के लिए माॅं को बुलाया था। वह दो दिन बाद जाएंगी वैसे यह सब छोड़ो ! तुम बताओ चाय लोगी या काॅफी ?' अरण्या ने कहा

' सर दर्द कर रहा है बहन , तों तेरे हाथ की काॅफी ही पी लेती हूॅं ।" शिविका ने अपना सिर पकड़ते हुए कहा

' क्या हुआ बहन तुम ठीक तो हों ?   मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा ।'  अरण्या ने शिविका के सिर पर हाथ रखते हुए कहा

' मैं ठीक हूॅं सिर्फ थोड़ा सा सिर भारी है ।' शिविका ने झूठी मुस्कान के साथ कहा

' लगता है मेरी बहन रात को सो नही रही तभी तो सुबह-सुबह भी सिर दर्द कर रहा है ।'     अरण्या ने शिविका को छेड़ते हुए कहा

' तुम भी ना अरण्या ! कोई मौका नहीं छोड़ती मेरा मजाक उड़ाने में'        शिविका ने कहा

' मैं काॅफी बना कर लाती हूॅं उसके बाद बैठकर बातें करते है ।'  अरण्या ने शिविका से कहा और किचन की तरफ चली गई

जब तक अरण्या काॅफी बना कर लाई नहीं तब तक शिविका उधेड़बुन में ही लगी रही उसे सूझ ही नहीं रहा था कि अरण्या से इस मामले में बात - चीत कैसे शुरू करें कही वह गुस्सा हों गई तों बात बनने की जगह बिगड़ ना जाएं यह सोच शिविका को परेशान कर रही थी

अरण्या ने काॅफी का कप टेबल पर रख भी दिया लेकिन शिविका अपने ही विचारों में गुम रही शिविका की ऐसी हालत देखकर अरण्या को चिंता होने लगी अपनी बहन जैसी दोस्त के माथे पर परेशानी की शिकन वह उसके आते ही देख चुकी थी सिर्फ उस परेशानी की वजह वह अब तक नहीं जान पाई थी शिविका की हालत देखकर अरण्या उसी तरह तड़प उठी जैसे कोई प्यार करने वाला प्रेमी / प्रेमिका अपने प्यार को परेशान देखकर तड़प जाता/जाती है

अरण्या ने शिविका को झकझोरते हुए कहा :- " मेरा मन घबरा रहा है तुम तो ऐसी नहीं थी उछल-कूद और ऊंटपटांग  बातें कर मुझे परेशान करने वाली मेरी बहन आज खुद परेशान है कोई बात तों है जों तुम्हें परेशान कर रही है हम दोनों ने मिलकर बड़ी - बड़ी परेशानियों के छक्के छुड़ा कर उन्हें अपने से दूर किया है जों भी परेशानी है मुझे बताओ ! हम मिलकर इस परेशानी को दूर करेंगे

' तुमने सच कहा अरू हम दोनों ने हर परेशानी का मिलकर सामना किया है और हमें सफलता भी मिली है अनजाने में ही सही लेकिन मैंने अपनी खुशी के लिए कुछ ऐसा कर दिया है जिसके कारण मैं अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगी ।' शिविका ने अरण्या की तरफ देखते हुए कहा

' ऐसा क्या कर दिया तुमने जों मुझे नहीं मालूम ? '
अरण्या ने शिविका से पूछा

' सुजाॅय का दिल दुखाया है मैंने अपनी खुशी के लिए मैंने उसके दिल के साथ खेला है अगर मैंने उस दिन तुम्हें उसके पास नहीं भेजा होता तों शायद आज सुजाॅय की हालत ऐसी नहीं होती ।'      शिविका ने कहा

' क्या हुआ सुजाॅय को ? वह ठीक तों है ना ? ' अरण्या ने घबराकर शिविका से पूछा

शिविका ने चौंक कर अरण्या को देखा शिविका को अपनी तरफ यूं आश्चर्य से देखते हुए देखकर अरण्या ने अपने आप को संभाला और शिविका से कहा :-
" शिबू ! काॅफी ठंडी हो रही है पहले काॅफी पी लेते हैं उसके बाद बात करते हैं

अरण्या ने शिविका की तरफ काॅफी का कप बढ़ा दिया जिसे शिविका ने अरण्या की ऑंखो में देखते हुए पकड़ लिया दोनों काॅफी पीने लगे दोनों चुप थे लेकिन दोनों के दिल में सवालों के तूफ़ानों ने अपना कहर मचाना शुरू कर दिया था

अरण्या की घबराहट और उसकी ऑंखो में अनजाने डर को शिविका पहले ही देख चुकी थी सवालों का बवंडर उसके मन में कोहराम मचाने लगा था और इनसे वह जल्द से जल्द छुटकारा पा लेना चाहती थी ताकि वह किसी निष्कर्ष पर पहुॅंच सकें

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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4 Comments

Seema Priyadarshini sahay

06-Dec-2021 06:16 PM

बहुत ही रोचक

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Chirag chirag

02-Dec-2021 09:19 PM

Nice part

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✍️✍️

08-Sep-2021 10:03 PM

बेहद ख़ूबसूरत कहानी....!

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