Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- १९" प्यार की दुहाई "

              भाग :- १९ " प्यार की दुहाई " 

' कई बार ऐसा होता है कि गलती किसी और की होती है और सजा हमें भुगतनी पड़ती है मैंने सुना था " ईश्वर का एक  विधान है कि हमारे कर्म , विचार और भावना के अनुसार ही हमें सुख या दुःख की प्राप्ति होती है और वह सुख या दुःख हर किसी को स्वयं ही भोगनी पड़ती हैं मैंने तों ऐसा कोई कर्म नहीं किया और ना ही किसी के प्रति बुरे विचार और भावना ही अपने मन में रखी थी जिससे कि मुझे दुख की प्राप्ति हो लेकिन आज ऐसा हों रहा है मैं जो नहीं चाहता वही हों रहा है और मेरी दशा ऐसी हैै कि मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता ‌।सुजाॅय ने दुःखी स्वर में कहा

' आप फिर से घुमावदार रास्तों की तरह बातें करने लगे मुझे ऐसी गोल - मोल बातें कभी भी समझ में नहीं आई और मुझे तों लगता है ऐसी बातें मुझे कभी भी समझ में आएंगी ही नहीं शिविका ने मुस्कराते हुए  कहा

' सच कहूं तो शिविका जी ! हम दोनों ही एक-दूसरे से शादी नहीं करना चाहते लेकिन हमारे पिता ऐसा ही चाहते है मैं अपने पिता से कोई सवाल नही कर सकता , उनके निर्णय पर कुछ कह नहीं सकता लेकिन आप तों ऐसा कर सकती है ?  सुजाॅय ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा

' मैं .... क्या कर सकती हूॅं ?शिविका ने सुजाॅय की तरफ देखते हुए उससे पूछा

' यही कि आपको मुझसे शादी नहीं करनी ?सुजाॅय ने कहा

' आपने तों पहले ही शादी के लिए हाॅं कर दी हुई है ऐसे में मैं कैसे मना कर सकती हूॅं ?'   शिविका ने कहा

' मैं तों अपने डैडी को किए गए वादे के कारण शादी के लिए इंकार नहीं कर सकता लेकिन आप तों ऐसा कर सकती है मिस शिविका ?'     सुजाॅय ने कहा

' मैं पापा से क्या कहूंगी कि मैंने शादी के लिए क्यों इंकार किया ?' शिविका ने कहा

' आप कुछ भी कह दीजिए कह दीजिए कि आपको 
मैं पसंद नहीं क्योंकि आप भी तों ऐसे लड़के से शादी नहीं करना चाहेंगी जों किसी और को पसंद करता हों , किसी और से प्यार करता हो     सुजाॅय ने कहा

' यह सच है कि आप किसी और से प्यार करते है लेकिन जहाॅं तक मुझे मालूम है अरण्या आपसे प्यार नहीं करती ।'   शिविका ने कहा

' मैं जानता हूॅं कि अरण्या जी मुझसे प्यार नहीं करती लेकिन मैं तो करता हूॅं ना ।'  सुजाॅय ने कहा

' मान लीजिए मैंने आपसे शादी करने से इंकार कर दिया लेकिन आपकी शादी किसी ना किसी से तो आपके डैडी जरूर करवा कर ही दम लेंगे'  
शिविका ने कहा

' मेरी शादी किसी और से हों यह मंजूर है मुझे लेकिन मैं कभी भी ऐसी लड़की से शादी नहीं करना चाहूंगा जिसने मुझे धोखा दिया हों ।' सुजाॅय ने तीखे तेवर के साथ कहा

' मैंने आपको धोखा दिया , कहीं मेरे कान गलत तों नहीं सुन रहें ?'       शिविका ने कहा

' आपके कानों ने बिल्कुल सही सुना है और जों सच है वही सुना है आपकी वजह से ही मैं अरण्या जी से मिला और उनसे पहली नजर में ही प्यार कर बैठा मैंने पहली बार उनके लिए अपने दिल में जज्बातों को पनपते हुए देखा आज तक मेरा दिल किसी और लड़की के लिए धड़का लेकिन उस दिन अरण्या जी को रेस्टोरेंट में देखकर मेरा दिल धक-धक करने लगा था मेरे जज्बातों को और भी बढ़ावा तब मिला जब मैंने जाना कि जिस लड़की से मैं मिलने आया था वह अरण्या जी ही थी यह जानकर मैं अपनी किस्मत पर इतराने लगा उनके लिए मेरे जज़्बात नदी की धार की तरह बहने लगें पल भर में ही मैं अपने आप को इतना खुशनसीब समझने लगा जितना आज तक किसी ने अपने आप को नही समझा होगा ।' सुजाॅय ने मुस्कराते हुए कहा

कुछ देर यूं ही मुस्कुराते रहने के बाद सुजाॅय की ऑंखो में गुस्सा झलकने लगा । उसने गुस्से से कहना शुरू किया " उन पलों को आज भी सोचता हूॅं तों ऑंखो से ऑंसू बहने लगते हैं और वह ऑंसू खुशी के ऑंसू रहते है लेकिन अगले ही पल जब आपकी और अरण्या जी की धोखे की सच्चाई ऑंखो के सामने आती है मेरे दिल में आपके लिए नफरत और भी बढ़ जाती है क्योंकि आप ही वह कारण है जिसके कारण आज मेरी यह हालत है ।"

' मैंने यह सब किया लेकिन ऐसा मैंने अपने लिए नहीं किया बल्कि ...
शिविका आगे बोल पाती इससे पहले ही कमरे में शिविका के पापा की कड़कदार आवाज गूंजने लगी

' बेटा ! मुझे तो लगा था कि तुम अपने होने वाले पति को अपना कमरा दिखा रही होगी इसलिए मैं वहीं पर चला गया था लेकिन वहाॅं पर किसी को भी नहीं पाकर मैं यहाॅं चला आया लगता है काफी गंभीर बाते हों रही है तुम दोनों के बीच ?'  शिविका के पापा ने कहा

' ऐसा कुछ नहीं है ।'         शिविका और सुजाॅय ने एकसाथ ही कहा

दोनों को एकसाथ और एक ही बात बोलते देखकर शिविका के पिता ने मुस्कुराते हुए कहा :- " लगता है दो ही मुलाकातों में तुम दोनों के दिल के तार इस कदर जुड़ गए हैं कि दोनों के सुर भी एक हों गए हैं यह देख कर मुझे तों बड़ी खुशी हो रही है तुम दोनों इसी तरह हमेशा खुश और एक साथ रहों , मेरे लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं होगा बिन माॅं की बच्ची को मैंने हर वो खुशी देने की कोशिश की है जो इसके लिए उपयुक्त हो शिविका के पिता ने अपनी बेटी के सिर पर हाथ रखते हुए कहा

कुछ देर बाद शिविका के पिता ने सुजाॅय की तरफ देखते हुए कहा :- " जब मैंने तुम्हें पहली बार तुम्हारे पिता की कंपनी में देखा था तभी मैंने तुम्हें पहली नजर में ही  अपनी बेटी के लिए पसंद कर लिया था
मैं जानता था कि मेरी पसंद मेरी शिबू की पसंद होगी तभी तो मैंने इसे डेट पर भेजा क्योंकि मैं जानता हूॅं मेरी बेटी कभी भी मेरी पसंद के खिलाफ नहीं जाएगी और वह आज भी मेरी बात को मानते हुए वही करेगी जों बचपन से करती आई है ।''

यह कहकर शिविका के पिता ने शिविका और सुजाॅय को गले लगा लिया गुस्से से भरी दो ऑंखें शिविका को ही घूर रही थी शिविका ने जैसे ही लाल - लाल दो बड़ी - बड़ी ऑंखों को अपनी तरफ घूरते हुए पाया उसने तुरंत ही अपनी नजरें नीचें कर ली

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

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4 Comments

Seema Priyadarshini sahay

06-Dec-2021 06:16 PM

बहुत ही रोचक।आपसे इन्सपीरेशन मिलती है मैम

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Chirag chirag

02-Dec-2021 09:19 PM

Nice part

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Apeksha Mittal

07-Sep-2021 09:24 AM

बेहतरीन पार्ट ,

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