Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- १७ " प्यार का मतलब "

   भाग :- १७ " प्यार का मतलब " 

यदि कोई  मन में ठान लें और फिर उसके लिए कोशिश करें तों ऐसा कोई काम नहीं जों किया ना सकें अपने दोस्त अरण्या की बातें सुनकर शिविका ने भी ठान लिया था कि वह अपने पापा से जरूर बात करेगी

घर में घुसते ही शिविका को स्टडी रूम में अपने पापा की फोन पर बात करते हुए आवाज सुनाई दी मन में सोची हुई बात यदि सामने दिख जाएं तों मन को अपार हर्ष की अनुभूति होने लगती हैं यही शिविका के साथ हों रहा था उसे तो मानों मुॅंहमांगी मुराद मिल गई थी अपने पापा की इस समय, वह भी घर पर , देखकर ईश्वर को धन्यवाद दिए बिना  नहीं रह सकी वह ।

स्टडी रूम में दौड़ कर घुसते ही शिविका अपने पापा के गले लग गई उसके पापा ने भी उसके सर पर हाथ रख दिया

' बेटा तुमने तो मुझे खुश कर दिया ! अभी मैं सुजाॅय के डैडी से ही बात कर रहा था वह जल्द - से - जल्द तुमसे अपने बेटे की शादी करवाना चाहते हैं तुम दोनों दो डेट से मिल ही रहें हों मुझे लगता है कि एक-दूसरे को अच्छी तरह जान और समझ ही गए होंगे क्यों सुजाॅय बेटा मैं सही कह रहा हूॅं ना ?' शिविका के पिता ने कहा

' जी अंकल ! आपने बिल्कुल सही कहा ।' सुजाॅय ने कहा

स्टडी रूम में किसी और की आवाज सुन शिविका आश्चर्य में पड़ गई उसकी सारी खुशी पल भर में ही छू-मंतर हो गई उसने पलट कर आने वाली आवाज की तरफ देखा

सामने सुजाॅय ही खड़ा था व्हाट्सएप के प्रोफाइल पिक में शिविका ने उसकी फोटो देखी थी जिन ऑंखो में कुछ देर पहले खुशियां और उम्मीद तैर रही थी उन्हीं ऑंखो में अब गम और नाकामी के बादल छा गए थे

' क्या सोच कर आई थी और क्या हों रहा है ? ऐसा तों मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कल तक तों यह शादी नहीं हों रही थी और सुजाॅय ने भी मैसेज किया था कि वह मुझसे शादी नहीं करना चाहतें तों फिर एक दिन में ही ऐसा क्या हों गया कि सुजाॅय ने शादी के लिए हाॅं कर दी और आज घर भी गए ?' शिविका ने मन ही मन में खुद से कहा

' क्यों बेटा सुजाॅय ! मेरी इस जिद्दी बेटी ने तुम्हें दोनों डेट में परेशान तों नहीं किया ?' शिविका के पिता ने शिविका की तरफ देखकर सुजाॅय से पूछा

' अंकल जी ! ऐसा तो कुछ नहीं किया आपकी बेटी ने कि मुझे परेशानी झेलनी पड़ी वैसे आपकी बेटी के जिद्दी स्वभाव की वजह से ही आज हमारी  शादी  हों  रही है । शिविका जी ! याद तों होगा ही आपको कि हमारी पहली और दूसरी डेट कैसी थी ?  हमने क्या - क्या बातें की थीं ?  हमारी  उन्हीं दो मुलाकातों की वजह से आज मैं यहाॅं  पर  हूॅं ।'        सुजाॅय ने  शिविका की तरफ बढ़ते हुए कहा

' जी याद है ।' शिविका ने धीरे से कहा और नजरें नीची कर ली

' आपको तों यह भी याद होगा कि पहली डेट पर कैसे आपने मुझे उल्लू बनाया था ?  आश्चर्य की बात तों यह हैं कि मैं सब-कुछ जानते हुए भी उल्लू बन गया
क्यों शिविका जी ? मैं गलत तों नहीं कह रहा ना ? '
सुजाॅय ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा

शिविका ने अपनी नज़र उठाई और सुजाॅय को देखने लगी

' आज तों यह मेरी पापा के सामने सारी पोल खोल कर ही मानेगा लगता है मैंने और अरण्या ने जों कुछ इसके साथ किया इसका बदला लेने के लिए आज यह यहाॅं पर आया है इसे बातों में उलझा कर पापा को समझाना पड़ेगा ऐसा नहीं हुआ तों पापा मेरी बैंड बजा देंगे ।' शिविका ने मन ही मन में कहा

' पापा ! कहीं पर बैठ कर तसल्ली से बातें करते हैं कितनी देर तक ऐसे खड़े होकर बातें करते रहेंगे ? '
शिविका ने अपने पिता की तरफ देखते हुए कहा

' तुम दोनों बैठ कर बातें करों मुझे एक इम्पोर्टेंट काॅल करनी है मैं काॅल करके तुम दोनों को ज्वाइन करता हूॅं तुम दोनों से शादी के बारे में कुछ बातें करनी हैं '   शिविका के पिता ने सुजाॅय और शिविका की तरफ देखते हुए कहा

' आपने तों मैसेज किया था कि यह शादी नहीं .....
शिविका की बातें पूरी हों इससे पहले ही सुजाॅय ने शिविका की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा :- " तुम्हें अगर शादी नहीं करनी थी तों अपने पापा से मना कर सकती थी तुमने मेरे साथ यह गेम क्यों खेला ? "

शिविका चुप ही रही नजर नीची कर वह खड़ी रही
शिविका को चुप देख सुजाॅय  का  गुस्सा और बढ़ गया

' यूं चुप मत रहिए मेरे सवाल का जवाब दीजिए

यह कहकर सुजाॅय ने दीवार पर इतनी जोर से अपना मुक्का मारा कि उसके हाथ से खून निकल आया

शिविका दीवार पर मुक्के की आवाज सुनकर डर  गई जब उसने सुजाॅय की तरफ देखा , सुजाॅय के हाथ से खून निकलता देख वह दौड़ कर फस्टेड बाॅक्स लें आई सुजाॅय के हाथ में पट्टी बाॅधते हुए शिविका ने कहा :- " मैं मानती हूॅं कि मेरी वजह से आपको तकलीफ हुई है लेकिन यकीन मानिए मेरा इरादा ऐसा बिल्कुल भी नहीं था मैं तों बस यह चाह रही थी कि आप इस शादी के लिए इंकार कर दें ।''

' आप डेट पर खुद आकर भी तों मुझे मना कर सकती थी आपने अरण्या जी को स्वयं की जगह पर क्यों भेजा ?'  सुजाॅय ने दुःखी होते हुए कहा

' मैं इस शादी के लिए इंकार नहीं कर सकती थी और मुझे आपसे ही नहीं , किसी और से भी शादी नहीं करनी थी और एक और वजह थी जिसके लिए मुझे ऐसा करना पड़ा ।'  शिविका ने कहा

' एक और वजह मैं कुछ समझा नहीं ?सुजाॅय ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा

' यह वजह आपके लिए जानना इतना जरूरी  नहीं है मैं सिर्फ इतना कह सकती है कि इससे किसी का भला ही हुआ है क्योंकि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो किसी का एहसान नहीं लेना चाहते' शिविका ने कहा

' किसी का भला करने के लिए आपने मेरे साथ ...
कहते हुए सुजाॅय की ऑंखो के कोर गीले हो गए

' मुझे आपके लिए बहुत बुरा लग रहा है मैं जानती हूॅं कि आप मेरी दोस्त अरण्या को पसंद करने लगें थे और शायद आप उसे प्यार भी करते है लेकिन अरण्या तों .... ।'  शिविका कहते - कहते रूक गई

' आपने बिल्कुल सही कहा शिविका जी । मैं अरण्या जी से प्यार करता हूॅं लेकिन प्यार का मतलब सिर्फ यह नहीं कि हम हमेशा उसके साथ रहे  । प्यार तो ऐसा होना चाहिए   जो एक-दूसरे से  दूर  रहने  पर  भी खत्म नहीं हो और  प्यार करने वाला  सिर्फ और सिर्फ अपने प्रेमी या प्रेमिका की  खुशियों को ही प्राथमिकता दें ऐसा प्यार अगर मैं कर पाया तों अपने आप को खुशनसीब समझूंगा । एक पल की खुशी भी अपने प्यार को दें पाया तो मुझे उससे दोगुनी खुशी मिलेगी ।'
हल्के से मुस्कुराते हुए सुजाॅय ने कहा

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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8 Comments

Chirag chirag

02-Dec-2021 09:18 PM

Very nice

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Naymat khan

30-Nov-2021 01:32 AM

Amazing

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Fiza Tanvi

06-Sep-2021 11:34 AM

Good

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