Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- १६ " सपने और पहचान "

              भाग :- १६ " सपने और पहचान " 

कहते हैं कि यदि किसी को  प्यार होता है तो उसकी  ज़िन्दगी बदल जाती है  ।  जिन्दगी बदलती है या नही, यह तो उस पर निर्भर करता है जिसे प्यार हुआ हो लेकिन इतना तो जरूर है कि यह  प्यार, उसे करने वाले  को अवश्य बदल देता है । सुजाॅय की जिंदगी बदलेगी यह तो वह नहीं जानता था लेकिन वह इस बात को जानता था कि अरण्या के प्यार में वह बदल चुका है । एक तरफ तों  वह अरण्या को प्यार करता था , उसे अपने करीब रखना और खुद भी उसके करीब रहना चाहता था , उसके साथ खुश रहना चाहता था वही पर दूसरी तरफ वह अपने खुशियों को भुला कर अरण्या को सिर्फ खुश देखना चाहता था और वह बखूबी जानता था कि अरण्या की खुशी किसमें है ।

दूसरे दिन शिविका और अरण्या अस्पताल के पास वाले रेस्टोरेंट में मिलें । शिविका की खुशी उसके चेहरे पर झलक रही थी और वह बार - बार अरण्या को धन्यवाद दिए ही जा रही थी । वह  कल की दूसरी डेट के बारे में भी
अरण्या से पूछ रही थी जिसे अरण्या ने बताया भी लेकिन उसने  गाने वाली बात छुपा ली ।

' अच्छा ही हुआ कि तुमने खुलकर सारी सच्चाई उसके सामने रख दी । सच्चाई जानने के बाद ही तों उसने शादी के लिए मना किया है लेकिन मेरी समझ में एक बात नहीं आई वह तो तुम्हें प्यार करने लगा था । उसने तुम्हें ऐसे ही आने दिया  कुछ कहा नहीं ? ।'   शिविका ने अरण्या को  छेड़ते  हुए कहा ।

' छोड़ ना इन बातों को । तू तो जानती है , मुझे इन सबमें कोई इंटरेस्ट नहीं है । मुझे तो बस डाॅक्टर बनना है और यही मेरा पहला और आखिरी प्यार है ।' अरण्या ने कहा ।

' उसने तुम्हें अपने प्यार का इजहार किया और तुम्हें कुछ नहीं हुआ ?  कहीं तुम भी तो उसे प्यार नहीं करने लगी ?'
शिविका ने कहा ।

' क्या ...... बोलें जा रही है । वैसे भी उसने मुझे दूसरी लड़की समझ अपने प्यार का इजहार किया था ।' अरण्या ने झूठ बोलते हुए कहा ।

' अच्छा ! इसका मतलब यह है कि तुम उससे प्यार नहीं करती ।'     शिविका ने कहा ।

' बिल्कुल भी नहीं ! मुझे प्यार सिर्फ सपने से है और जब तक मैं अपने सपने को सच नहीं कर लेती तब तक मैं  इन फालतू चीजों के बारे में सोचना तक नहीं चाहती ।'
अरण्या ने कहा ।

' यह तुमने बिल्कुल सही कहा । तुम डाॅक्टर बन जाओगी मेरे लिए इससे बड़ी खुशी कुछ और नहीं होगी ।' शिविका ने अरण्या का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा ।

' मैं भी तुम्हारे लिए खुश हूॅं शिबू । तुम अपने पापा को खुलकर बता दो कि तुम्हारा सपना सिर्फ शादी करना नहीं  है बल्कि तुम भी अपनी पहचान बनाना चाहती हों । मुझे विश्वास है कि अंकल जी अपनी एकलौती संतान को समझेंगे और आगे तुम्हें किसी और लड़के से मिलवाने और तुम्हारी शादी करने की बजाय तुम्हारा साथ देंगे ।' अरण्या ने कहा ।

' पापा का कहना है कि तुम मेरी बेटी हों , यह पहचान ही तुम्हारे लिए काफी है और वह अपने से और ज्यादा रईस खानदान में मेरी शादी इसलिए करना चाहते हैं कि उनका रूतबा इस समाज में और भी बढ़े और साथ ही मेरा भी ।'
शिविका ने कहा ।

" तुम एक बार अंकल जी से बात करके तों देखो मैंने कहीं पर पढ़ा था कि किसी भी माता - पिता के लिए उसकी संतान की खुशी से बढ़कर कुछ नहीं होना चाहिए हों सकता है अंकल जी तुम्हारी खुशी को जानकर तुम्हारा साथ देने के लिए राजी हों जाएं ' अरण्या ने कहा

' पापा मेरी नहीं सुनते अरू । बचपन से लेकर आज तक उन्होंने जो कहा वह मुझे करना पड़ा । आज पहली बार ऐसा हो रहा  है कि मैंने जो चाहा वह हुआ है । मैं शादी नहीं करना चाहती थी और वह नहीं हो रही है लेकिन कब  तक ? एक दिन फिर से ऐसा दिन आएगा कि  पापा कोई और रईस  लड़के के साथ मेरी डेट फिक्स कर देंगे और कहेंगे कि जाओ शिबू बेटा ! इस लड़के से मिलों । हम सब चाहते हैं कि इससे तुम्हारी शादी हों और उसके बाद क्या होगा ?  मेरी मर्जी नहीं होते हुए भी मुझे उस लड़के से मिलनी पड़ेगी और एक दिन ऐसा भी आएगा कि मुझे उसे लड़के से  शादी भी करनी पड़ेगी जिस से पापा कहेंगे । पापा को लगता है कि वह मेरी सारी इच्छाओं की पूर्ति कर रहे हैं और वह करते भी है लेकिन क्या मेरी इच्छाएं  नई - नई जगह पर घूमना - फिरना , डिजाइनर कपड़े पहनना, लेटेस्ट कार में घूमना यही सब हैं । क्या मेरा मन नहीं करता कि पापा मुझसे बात करें । मेरे सिर पर हाथ रखे , मेरी छोटी - छोटी बातें उनके लिए मायने रखें , मेरे साथ रोज ब्रेकफास्ट , लंच और डिनर करें । तुम तो जानती हों अरु !  पापा महीने में पंद्रह - बीस दिनों तक तो बिजनेस टूर पर ही रहते हैं और बचे बाकी दिन यहाॅं होकर भी मेरे पास नहीं होते । महीने में दो - तीन ही ऐसा होता होगा जब हम साथ बैठकर डिनर या लंच कर रहे होते हैं । वह भी तब जब उनके बिजनेस के दोस्त हमारे यहाॅं आएं रहते हैं। ऐसे में तुम कह रही हों कि अपने पापा से बात करो ? तुम भी अच्छी तरह जानती हों कि ऐसा होना नामुमकिन है ।' 
शिविका ने मायूसी भरें शब्दों में कहा ।

' तुम एक बार अपने दिल की बात होंठों पर लाकर तों देखो , उन्हें जब तक तुम नहीं बताओगी उन्हें तुम्हारे पहचान बनाने वाली बात पता कैसे चलेगी ?  हिम्मत करो और जाकर साफ - साफ अंकल जी से अपने दिल की बातें कह दो । शायद अंकल जी ! वही करें जो तुम चाहती हो ।'   अरण्या ने शिविका का हाथ दबाते हुए कहा ।

' तुम कहती हो तों मैं आज हिम्मत कर उनसे बात करूंगी । मुझे उम्मीद तों कम है लेकिन एक बार कहने में क्या हर्ज है । शायद पापा मान जाएं ।'   शिविका ने कहा ।

' यह हुई ना बात मेरे बेस्ट फ्रेंड जैसी ।'  कहते हुए अरण्या मुस्करा दी साथ ही  शिविका भी  मुस्करा उठी ।

अरण्या और शिविका आने वाले समय से बेखबर  बहुत देर तक इधर-उधर ‌की बातें कर खुश  हो  रही थी । दोनों की खुशी उनके ऑंखो से होती हुई उनके होंठों तक आ चुकी थी । इस पल दोनों बहुत ही खुश थी ।

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

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5 Comments

Seema Priyadarshini sahay

06-Dec-2021 06:14 PM

बहुत रोचक

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Chirag chirag

02-Dec-2021 09:17 PM

Nice mam

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Naymat khan

30-Nov-2021 01:32 AM

Amazing

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