Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- ११ " दूसरी डेट का सुखद एहसास "

                              भाग :- ११ " दूसरी डेट का सुखद एहसास " 

व्यक्ति की जब मनमाॅंगी मुराद पूरी हो  जाएं तों उसकी खुशी की कोई सीमा नहीं होती । अरण्या द्वारा डेट पर आने  के लिए हाॅं  की मंजूरी मिलना  सुजाॅय के लिए खुशी का सबक ही तों थी और हाॅं !  उसे पूरी उम्मीद थी कि कल  अरण्या अपने दिल की बातें पूरी सच्चाई के साथ उसके सामने जरूर रखेगी और इसी दिन का इंतजार तों वह इतने दिनों से कर रहा था ।

अरण्या किसी के साथ धोखा कर अपने स्वप्न को पूरा करना नहीं चाहती थी वह जानती थी कि उस जैसी गरीब लड़की सुजाॅय जैसे अमीर की पत्नी कभी नहीं बन सकती यह समाज ऊंच - नीच , जात - पात की दीवारों को गिराने की लाख बातें कर लें लेकिन इसे स्वयं आगे बढ़ कर गिराने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती हैं इस बात को अरण्या जैसी लड़की के लिए समझना कोई बड़ी बात नहीं थी

अरण्या जानती थी कि सुजाॅय उसे प्यार करता है और उसके द्वारा कहें जज्बातों ने उसके खुद के दिल में भी सुजाॅय के प्रति प्यार का एहसास जगा ही दिया है यह एहसास सुजाॅय और शिविका की आने वाली जिंदगी को बर्बाद करें उससे पहले ही वह उन दोनों की जिंदगी से बहुत दूर चली जाना चाहती थी

बात जहाॅं समानता की हो वों अवश्य पूरी होती है सुजाॅय के पिता और शिविका के पिता दोनों की ही गिनती इस शहर के रईसों में होती हैं इस बात को अरण्या भली-भांति जानती थी शिविका का हठी स्वभाव उसके पिता अपने स्टेटस को आगे बढ़ाने में कभी भी रोड़ा बनने नहीं देंगे एक - ना - एक दिन शिविका और सुजाॅय का मिलन होकर रहेगा अरण्या इन सारी बातों से अवगत थी गरीबी व्यक्ति को उन अनदेखे पहलुओं को भी दिखा देती हैं जिसे ऑंखें भी नहीं देख पाती हैं 

एक गरीब  और बेसहारा  लड़की अपने मन में छुपे जज्बातों को दबा कर आगे तों बढ़ सकती है लेकिन ऊंच-नीच की दीवारों को गिरा कर अपने प्यार को नहीं पा सकती अरण्या ने अपने कदमों को हमेशा के लिए पीछे खींचने का निर्णय कर लिया था आज की रात उसने अपने आप से एक और वादा किया कल के सफ़र की शुरुआत अच्छी तरह से और बेहतर ढ़ंग से करने का सोच कर वह नींद की आगोश में चली गई

' आज मैं पापा द्वारा लाएं गए रिश्ते से हमेशा के लिए आजाद हों जाऊंगी मुझे नहीं करी शादी पापा भी आज के बाद मुझपर पर शादी का दवाब नहीं दें पाएंगे क्योंकि आज की डेट के बाद सुजाॅय खुद ही इस रिश्ते के लिए मना कर देगा उसके बाद मैं आजाद हों जाऊंगी और वह करूंगी जों मेरा दिल करेगा ।'      शिविका ने खुश होकर खुद से कहा

' उम्मीद है ! आज सारी सच्चाई हम दोनों के सामने होंगी जिसका इंतजार मैं इतने दिनों से कर रहा था ।'
सुजाॅय ने मन ही मन में कहा

' आज के बाद मुझे किसी को धोखे में रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी सारी बातें विस्तारपूर्वक बता कर मैं हमेशा के लिए उन दोनों की जिंदगी से अलग हो जाऊंगी मेरे लिए मेरा स्वप्न और अपने पिता को दिया हुआ वचन ही सर्वोपरि हैं जिसके लिए मैं अपने जज्बातों की बलि देने से भी पीछे नहीं हटूंगी ।'   
अरण्या ने खुद से कहा

तय किए गए स्थान की जानकारी अरण्या को शिविका ने सुबह-सुबह ही फोन करके दें दी थी
आज अरण्या तय समय से पूर्व ही उस स्थान पर पहुॅंच चुकी थी उसे इंतजार था तो सिर्फ सुजाॅय के आने का कहते हैं ना इंतजार की घड़ियां लम्बी होती है और प्यार करने वालों के लिए तों यह शत प्रतिशत सही भी साबित होता हैं और यहाॅं भी मन में ही दबी लेकिन प्यार भरें जज़्बात तों आखिर थें ही साथ ही अपने स्वप्न को साकार करने की ललक भी थी

अरण्या को देख सुजाॅय के होंठों पर मुस्कान छा गई
अचानक ही मद्धिम - मद्धिम गाने बजने लगे चारों तरफ ठंडी-ठंडी सर्द हवाओं की सरसराहट उसके कानों में इस गर्मी में भी ठंडक का एहसास करा रही थी अरण्या को अपनी तरफ आते हुए देखकर सुजाॅय का मन - मयूर नाच उठा अरण्या का हाथ अपने हाथ में लेकर वह उसके साथ डांस करने लगा
अरण्या भी सुजाॅय के इतने समीप आकर खुद अपने आप में ही सिमट रही थी शर्म उसकी ऑंखें में साफ़ झलक रही थी शर्म से उसके नयन ऊपर उठ ही नहीं रहें थे बल्कि झुके ही जा रहें थे सुजाॅय का हाथ अपनी प्रेयसी के हाथ में था और इस पल को वह जी लेना चाहता था गाने की धुन पर थिरकते प्रेमी युगल इस सुखद पल की अनुभूति  कर लेना चाहते थे इस पल को ऑंखें बंद कर अपने दिल में  सदैव के लिए समेटने का प्रयास करता हुआ सुजाॅय आगे बढ़ ही रहा था कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख जोर से झकझोरा

सुजाॅय ने अपनी बंद ऑंखें खोली और सामने अरण्या को खड़ा देखकर चौंक पड़ा आश्चर्य से वह अपने चारों तरफ देखने लगा गाने बजने भी रूक चुके थे , हवाओं की सर्द सरसराहट भी कानों में ठंडक नहीं दें रही थी जिस अरण्या को कुछ देर पहले तक वह अपने इतने करीब अनुभव कर रहा था वह तों उसके सामने दूर खड़ी उसे आश्चर्य भरी दृष्टि से देख रही थी सुजाॅय समझ चुका था कि कुछ देर पहले जों वह अनुभव कर रहा था वह मात्र उसका जागती आंखों से देखा हुआ स्वप्न था

' आप इतनी देर से वहाॅं पर खड़े होकर क्या कर रहे थे ? आपने मुझे देखा था या नहीं ?' अरण्या ने सुजाॅय से पूछा

सुजाॅय क्या जवाब देता ? जिस पल को वह कुछ देर पहले अरण्या के साथ जी रहा था वह सिर्फ उसकी कल्पना के वें सुखद अंश थे जिसे वह सिर्फ और सिर्फ अरण्या के साथ ही जीना चाहता था

सुजाॅय मौन रहा चुपचाप जाकर वह वहाॅं बैठ गया जहाॅं उसने अरण्या को बैठे हुए देखा था अरण्या कुछ देर तक वहीं खड़ी रही लेकिन अगले ही पल वह सुजाॅय के सामने बैठी थी

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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10 Comments

Seema Priyadarshini sahay

06-Dec-2021 06:07 PM

सुंदर कल्पना शक्ति।और लेखन

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Chirag chirag

02-Dec-2021 09:15 PM

Very nice

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Naymat khan

30-Nov-2021 01:30 AM

Good

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