Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- ७

                                          भाग :-

जब कोई  व्यक्ति  झूठ  का सहारा  लेता  है तों उस झूठ  को छुपाने के लिए वह सबकुछ करने के लिए तैयार रहता है जो दूसरों की नजरों में या कभी - कभी तों स्वयं की नजरों में भी अनुचित होता है । शिविका ने अपने पिता की बात नहीं मानते हुए अपने स्थान पर अरण्या को सुजाॅय से मिलने  भेज दिया । वह चाहती तो कुछ वक्त निकालकर खुद ही मिलने जा सकती थी लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया और आज वह अपने द्वारा फैलाएं झूठ पर पर्दा डालने का काम करने जा रही थी । उसे इस बात का एहसास बिल्कुल भी नही था कि उसके  द्वारा बोला गया एक झूठ आगे जाकर तीन - तीन जिंदगियों को तबाही की ओर भी लें जा  सकता हैं ।

' हलो पापा !  मुझसे एक भूल हों गई जिसका पता मुझे अभी चला हैं । मैं आज आपके द्वारा बताएं पते पर उस लड़के से मिलने चली तो गई थी लेकिन उससे उसका मोबाइल नंबर ही लेना भूल गई । क्या आप अंकल जी ( सुजाॅय के पिता ) से उसका मोबाइल नंबर लेकर मुझे अभी मेरे व्हाट्सएप पर भेज सकते हैं ?'    एक ही सांस में शिविका ने अपने पापा को फोन कर कहा ।

' बेटा ! उस लड़के का नाम सुजाॅय है । तुम उससे मिल कर आ भी गई लेकिन तुम्हें उसका नाम भी नहीं मालूम ?'  शिविका के पापा ने कहा ।

' पापा ! नाम तो मुझे मालूम है लेकिन मैंने आपसे उसका नाम नहीं पूछा है बल्कि उसका फ़ोन नंबर माॅंगा है और आप ज्यादा ही सवाल कर रहें हैं । एक तों मैं अभी शादी नहीं करना चाहती फिर भी आपके कहने पर सिर्फ आपके एक बार ही कहने पर मैं उस सुजाॅय से मिलने चली गई और आप अपनी ही बेटी पर शक कर सवाल करें ही जा रहें हैं । मुझे नहीं चाहिए उसका फोन नंबर । आज ही आप मना कर दीजिए और हाॅं बाकी और जो दो डेट्स बचें हुए हैं उसमें भी मैं अब जाने वाली नहीं ।'    शिविका ने यह कहते हुए फोन काट दिया ।

' यह क्या किया तुमने ? अगर अंकल जी ने आज के डेट के बारे में लड़के से पूछ लिया और नाम वाली असलियत उनके सामने आ गई तों खैर नहीं ।'  अरण्या ने डरते हुए कहा ।

' कुछ नहीं होगा और इस तरह खुद भी डरा नहीं करो और मुझे भी डराया मत करो । मैं अपने पापा को अच्छी तरह जानती हूॅं , वह कभी भी लड़के से बात नहीं करेंगे और अपनी तरफ से हरसंभव प्रयास करेंगे कि मेरी शादी उस सुजाॅय से हो जाएं। देखना तुम ! अभी ही वह फोन कर मुझसे कहेंगे कि बेटा ! मैंने सुजाॅय का मोबाइल नंबर तुम्हारे व्हाट्सएप पर भेज दिया है ।'    शिविका ने अपने पापा की नकल करते हुए  कहा ।

शिविका की उम्मीद के मुताबिक उसके पापा ने वैसा ही किया और फोन कर अपनी बेटी को इस बात से अवगत भी करा दिया ।

शिविका ने सबसे पहले तो अपने मोबाइल में सुजाॅय का मोबाइल नंबर सेव किया उसके बाद अपने  व्हाट्सएप प्रोफाइल में अपनी और अरण्या की फोटो लगाई ।  सुजाॅय  को हाय का मैसेज भेज वह उसकी तरफ से मैसेज आने का इंतजार करने लगी ।

जल्द ही शिविका का प्लान वर्क करने लगा और सुजाॅय उसे मैसेज कर उसके घर सलामती से पहुॅंचने की बात पूछने लगा । शुरूआती कुछ मैसेज अरण्या की मौजूदगी में ही दोनों ने मिलकर भेजे क्योंकि सुजाॅय आज रेस्टोरेंट में उनके बीच हुई बातचीत से संबंधित अधिकांश बातें ही मैसेज  कर रहा था ।

शिविका ने सुजाॅय को उनके बीच हुई बातचीत को किसी से बताने से मना भी कर दिया जिसे सुजाॅय की स्वीकृति जल्द ही मिल गई । इस बात से निश्चित हो शिविका ने बाद में बातें करने का कह इस छोटी सी ही  सही लेकिन अपने लिए महत्वपूर्ण बातों का समापन  किया ।

अरण्या को भी दिली सुकून मिला और वह शिविका के साथ अपने घर जाने के लिए काॅलेज कैंटीन से निकल कर पार्किंग एरिया की तरफ बढ़ने लगी ।

दूसरे दिन सुजाॅय खुशी - खुशी उस अस्पताल की तरफ जा रहा था जहाॅं उसने अपने जिगरी दोस्त मनोज को भर्ती कराया था । आज  अपने दिल में अरण्या के प्रति उठ रहें जज्बातों को उसे बताना जों था । रात भर वह ठीक से सो भी तो नहीं पाया था । रह-रह कर अरण्या का मासूम चेहरा उसके सामने आ जाता और वह उसे अपलक होकर कल  की तरह ही  देखता रहता । अरण्या .... यह नाम तो जैसे उसकी सांस में ही बस गया था ।

कहते हैं दिल में उठ रहें जज्बातों पर स्वयं के दिमाग का भी वश नहीं चलता । अपने दिमाग से अरण्या की छवि को सुजाॅय निकाल ही पा रहा था । ऑंखों और दिल पर तो इसी नाम और चेहरे ने  एक दिन के मुलाकात में ही अपना कब्जा जमा लिया था ।

व्हाट्सएप प्रोफाइल में अरण्या की तस्वीर को देख कर अनायास ही उसके जज्बातों ने ऐसी कुलांचे भरी कि वह अरण्या को " मेरी अरू " कहकर बुलाते हुए उसकी तस्वीर से ही बातें करना लगा ।

अपने दिल के जज़्बात को तस्वीर से कहते हुए कल रात कब उसकी ऑंख लगी उसे खुद को भी पता नहीं चला ? ।

अस्पताल के काॅरिडोर में चलते हुए कल रात की बातें याद करता हुआ वह  अपनी ही धुन में मस्त आगे बढ़ ही रहा था कि साइड के कमरे से अचानक निकली एक लड़की से वह बचते - बचते आखिर टकरा ही गया ।

साॅरी ... कहते हुए उसने जैसे ही उस लड़की की तरफ देखा , सामने अरण्या को देख कर एक पल को तो वह आश्चर्य में ही पड़ गया लेकिन अगले ही पल उसके होंठों पर मुस्कान आ गई ।

' अब तो तुम मुझे हर जगह नज़र आने लगी हों " मेरी अरू " ।  मैं जानता हूॅं तुम यहाॅं हो नहीं सकती लेकिन देखो ! तुम मुझे यहाॅं भी दिख रही हों । मेरे दिलो-दिमाग में  अब सिर्फ तुम ही तुम हो । जों लड़का किसी लड़की की तरफ ऑंख उठाकर नहीं देखता था आज तुम्हारे प्यार में पड़ उसकी ऑंखो में सिर्फ और सिर्फ तुम बस गई हो ।'   सुजाॅय ने उस लड़की की तरफ जो उसे उस वक्त अरण्या दिख रही थी से कहा ।

सुजाॅय की बातें सुन वह लड़की उठी और दौड़ कर एक कमरे के अंदर चली गई ।

' साॅरी  वन्स अगेन ... ।'     सुजाॅय ने दौड़ कर भागती हुई लड़की से कहा और उठकर मनोज के कमरे की तरफ बढ़ने लगा ।

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

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9 Comments

Chirag chirag

02-Dec-2021 09:14 PM

Nice written mam

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Naymat khan

30-Nov-2021 01:28 AM

Good bahut behtreen

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Fiza tanvi

29-Nov-2021 04:29 PM

Good

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