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12 शार्ट स्टोरी लघुकथा = the last phone call ( जेनर = प्रेरक )

लघुकथा

जेनर = प्रेरक 

शीर्षक  = The last  phone call


रघुपति  राघव  राजा राम, रघुपति  राघव  राजा राम दरवाज़े  पर  लगी  डोर बेल से आवाज़  आती  हे । आशा  जी, जो कि रसोईघर  में रात का खाना  बना  रही  थी  दरवाज़े  पर  हुयी दस्तक  सुन वो दौड़ती हुयी दरवाज़े  के पास  जाती और दरवाज़ा  खोलती ।


"अरे भैया  आप  यू इस तरह  अचानक  सब  ठीक  तो हे" आशा  जी ने एक सांस में सारे प्रश्न दरवाज़े  पर  खड़े  अपने भाई  आनंद  से पूछ  लिए


आंनद  जी घबराये  हुए घर  में कहते  हुए  घुसे " आशा  आशुतोष  किधर  हे  "

"क्या हुआ भैया इतने घबराये  हुए  क्यू लग रहे  हो और आशुतोष  का क्यू पूछ  रहे  हो " आशा  जी ने अपने भाई   से पूछा 

"कुछ  नही बस  मुझे  बताओ  कहाँ हे  वो और इस समय  क्या कर  रहा  हे  " आंनद  जी ने दोबारा पूछा

" भैया  कहाँ होगा जब  से आपके  जीजा की एक महीने  पहले  एक्सीडेंट में मौत  हुयी हे  तब  से ही वो अपनी पढ़ाई  लिखाई  छोड़  कर अपने कमरे  में अंधेरा  कर  के रहता  हे  और कहता  हे  उसके पिता उसकी वजह  से मर  गए  वो उन्हें बचा  सकता  था  लेकिन बचा  ना सका  " आशा  जी ने नम आँखों  से कहाँ

आंनद  जी ये सुन   आशुतोष  के कमरे  की तरफ  दौड़े और बोले " बेटा आशुतोष  भगवान  के लिए  कुछ  ऐसा वैसा मत  करना  वरना  तुम्हारी माँ जीते  जी मर  जाएगी "

"क्या करने  वाला हे  आँशु ?  कुछ  तो बताओ  भैया  मेरा दिल बैठे  जा रहा  हे  " आशा  जी ने अपने भाई  के पीछे  दौड़ते हुए  कहाँ।

दोनों आशुतोष  के दरवाज़े  के पास  आकर  दरवाज़े  को खटखटाने  लगे  और ज़ोर ज़ोर से आवाज़  लगायी  " आँशु  बेटा दरवाज़ा  खोलो  तुम अपने आप  को अपने पिता की मौत  का ज़िम्मेदार मत  समझो  देखों मैं आ  गया  हूँ तुम्हारा मामा बैठ  कर  बात करते  हे  "

आशा  जी रोते हुए "   भैया आपको  माता रानी की कसम  कुछ  बता  दो कि आखिर  आँशु  अंदर  किया कर  रहा  हे  जिसकी वजह  से आप  यूं भागते  हुए  आये  हो मेरा दिल घबरा  रहा  हे  मुझमे  अब कोइ और दुख  बर्दाश  करने  कि हिम्मत नही इनके जाने के बाद "


आंनद  कहता  हे  " आशा , मेरी बात ध्यान से सुनो हम  आँशु  को कुछ  नही होने देंगे "

"क्या मतलब  कुछ  नही होने देंगे? क्या करने  वाला हे  आँशु ?" आशा  जी ने अपने भाई  से तेज आवाज़  में पूछा 

" आशा  बात इस प्रकार हे  कि अभी  अभी  मेरे पास  आँशु  का फ़ोन  आया  था  और वो बहुत  परेशान  लग रहा  था  और बहकी  बहकी  बाते कर  रहा  था , वो कह  रहा  था  कि उसकी एक गलती  कि वजह  से उसकी माँ का सुहाग उजड़ गया  और वो विधवा  कि ज़िन्दगी ज़ीने  पर  मजबूर  हो गयी । लेकिन अब नही अब मैं भी  पापा के पास  जा रहा  हूँ अपने गुनाह की माफ़ी मांगने आप  माँ का ख्याल  रखना  और माँ से कहना  मुझे  माफ कर  दे । मैं उनका अच्छा बेटा ना बन  सका  " आंनद  जी ने अपनी बहन  को बताया 

ये सुन आशा  जी ने अपने मुँह पर  हाथ  रखा  और कहाँ "हे! राम मेरे बेटे को कुछ  मत  होने देना वही  तो मेरे जीने  की आखिरी  वजह  हे  भैया  जल्दी कुछ  करो  दरवाज़ा  तोड़ दो डॉक्टर ने मुझे  बताया  था  की आँशु  डिप्रेशन  का शिकार  हो गया  हे  और वो अपने पिता की मौत  का ज़िम्मेदार खुद  को मानता हे  इसलिए  वो कभी  भी  कोइ भी  ऐसी हरकत  कर  सकता  हे  जिससे की उसकी जान भी  जा सकती  हे  इसलिए  उसे अकेला मत  छोड़ना  और कोइ भी  धार धार  चीज  उसके पास  मत  रखना  वरना  वो स्वयं को नुकसान पंहुचा  सकता  हे "

आशा और आनंद  ने मिलकर  दरवाज़ा  तोड़ दिया और दरवाज़ा  टूटते  ही आशा  जी की चीख  निकल गयी  जब  उन्होंने देखा  की उनके बेटे के हाथ  से खून  बहकर  
ज़मीन  पर  गिर रहा  हे  और पास  में एक कंपास पड़ा  हे  जो की खून  में सना  हे 

" भैया  मैं आप के आगे  हाथ  जोड़ती हूँ मेरे बेटे को बचा  लो वरना  मैं जीते  जी  मर  जाउंगी " आशा  जी ने रोते गिड़गिड़ाते हुए  कहाँ

आंनद  जी तुरंत  एम्बुलेंस को फ़ोन  करते  और उसे अस्पताल ले जाते, आशुतोष  की सांसे चल  रही  थी  किन्तु खून  बहुत  बह चूका  था  जिस वजह  से डॉक्टर को तुरंत  ऑपरेशन  करना  पड़ा ।


दरअसल  इस बात को जानने के लिए  कि आखिर  क्यू एक कॉलेज  में पढ़ने  वाले छात्र ने खुदखुशी  करने  कि कोशिश  की और क्यू वो खुद  को अपने बाप  कि मौत  का ज़िम्मेदार समझता  हे।चलते  हे  एक महीने  पहले ।


"बेटा आँशु  इतना मोबाइल में गेम  मत  खेला  करो  वरना  आँखे  ख़राब  हो जाएगी " उसकी माँ आशा  ने कहाँ

"अरे माँ कुछ  नही होता थोड़ा  बहुत  खेलने  से और वैसे भी  मुझे  गेमर  बनना  हे  बड़े  होकर  मैं भी  pub g जैसा ही गेम  बनाऊंगा  और खूब  सारे पैसे कमाऊंगा । समझाओ  ना पापा मम्मी को " आशुतोष  ने मोबाइल में गेम  खेलते  हुए  कहाँ

"खेलने  दो भाग्यवन  अभी  नही खेले  गा तो कब  खेलेगा  " उसके पिता ने अपनी पत्नि आशा  से कहाँ

एक दिन आँशु  गेम  खेल  रहा  था घर पर  और उसकी माँ नानी के घर  गयी  थी  इसीलिए  उसके पिता बार बार फ़ोन  करके  उससे पूछा  रहे  थे  कि कही  वो अकेला बोर तो नही हो रहा  और खाना खा लिया। उसके पिता दिन में दो या तीन  बार ज़रूर  फ़ोन  करके  उसका हाल पूछते  थे । लेकिन आँशु  हमेशा  अपने खेल  कि वजह  से उनसे सीधे  मुँह बात नही करता  क्यूंकि उनसे बात करने  कि वजह  से वो अक्सर गेम  हार जाया करता था ।

आँशु  घर से थोड़ी  दूर के एक कॉलेज  से सॉफ्टवेयर में इंजीनियरिंग कर  रहा  था  घर  दूर  होने की वजह  से आँशु  हॉस्टल में रहता  था  और उसके पिता कभी  कभार उससे मिलने जाते। लेकिन वो दो बार आँशु  से फ़ोन  पर  बात ज़रूर  करते ।

लेकिन एक दिन आँशु अपने हॉस्टल में बैठा  pub g खेल  रहा  था  जिसमे वो काफी ऊँचे  पायदान पर  पहुंच  गया  था , तभी  अचानक  उसके पिता की कॉल आ  गयी ।

आँशु  pub g में इतना घुस  चूका  था  और जीतने  की चाह  में उसने अपने पिता की कॉल  नही उठायी  और बार बार काट ता रहा  अगर  वो फ़ोन  उठा  लेता तो हार जाता और उसकी सारी मेहनत  बेकार हो जाती जो भी  उसने अब तक  की थी । कम से कम  दस  मिस्डकाल  के बाद उसके पिता की कॉल  आना  बंद  हो गयी । और तकरीबन  एक घंटे  बाद एक अनजान नंबर  से उसके पास  कॉल  आयी  जिसमे एक पुलिस  वाले ने बताया  "कि यहाँ बॉयज हॉस्टल के पीछे  एक आदमी  का बाइक से एक्सीडेंट हो गया  था  उसने आख़री  बार आप  को ही कॉल  कि थी  आप  बता  सकते  हो कि ये आदमी  आप  का कौन हे  "

अपने पिता कि ऐसी हालत  के बारे में सुन आँशु  घबरा  जाता और लड़खड़ाती जुबान में कहता  " जी,,,,, जी,,,,, वो,,,,, वो,,,,, मेरे पिता जी हे , क्या आप  मुझे  बता  सकते  हो वो अब कैसे हे  आँशु  कि आँखों  में आंसू थे 


" बात  कुछ  यूं हे  कि हमने  तुम्हारे पिता को एम्बुलेंस में लेता कर  अस्पताल भेज  दिया हे , रास्ता सुनसान होने कि वजह  से यहाँ कोइ ज़्यादा आता  जाता नही हे  जिस कारण  तुम्हारे पिता जी यहाँ काफी देर तड़पते  रहे  शायद  वो मदद  के लिए ही तुम्हे फ़ोन  कर  रहे  थे  तुम जहाँ कही  भी  हो तुरंत  सहारा  हॉस्पिटल आ  जाओ "  पुलिस  वाले ने कहाँ।

" पिता जी को कुछ  नही हो सकता  वो हमें छोड़  कर  नही जा सकते , क्या मैं अपने पिता का कातिल हूँ  ना जाने क्या क्या कहता  हुआ वो अस्पताल पंहुचा 

जहाँ उसकी माँ और मामा पहले  से मौजूद  थे  और रो रहे  थे  क्यूंकि पिता जी रास्ते में ही दम  तोड़ चुके  थे ।

जब  उसे पता  चला  कि उसके पिता नही रहे  तब  उसने अपना सर  दीवार  में मारा और कहा मैं हूँ कातिल अपने बाप  का वो मुझे  मदद  के लिए  बुलाते रहे  और मैं गेम  जीतने  में लगा  रहा । अगर  में उनकी कॉल  उठा  लेता तो आज  मेरे लिए  उनकी ये कॉल  आखिरी  ना होती।

उसकी माँ को भी  जब  इस बात का पता  चला  कि उसके पति  ने मदद  के लिए  अपने बेटे को कॉल  की थी  किन्तु वो खेल में इतना मगन  था  की उसने अपने पिता की कॉल  को अंतिम कॉल  बना  दिया। उसने भी  उसे शुरू शुरू  में अपने पति  की मौत  का कसूरवार  समझा  परन्तु बाद में थोड़ा  बहुत  सही  हो गयी । लेकिन आशुतोष  डिप्रेशन  में चला  गया  उसने अपना मोबाइल तोड़ दिया और कहाँ यही  हे  जिसकी वजह  से मैं अपने पिता की मदद  ना करा  सका । उस दिन से अब तक  वो अपने आप  को अपने पिता की मौत  का ज़िम्मेदार समझता  हे  इसी लिए  उसने खुद  को ख़त्म  करने के लिए  अपनी नस  काट ली थी  परन्तु  बच  गया ।


और अपने घर  आ  गया । उसने इंजीनियरिंग छोड़  दी और अपने जैसे बच्चों को मोबाइल गेम  की लत छुड़ाने और उससे बचने  के लिए  अपनी माँ के साथ  मिलकर  एक कैंपेन चलाया  जिसका नाम रखा  " the last call of my father "



इस कहानी  मैं छिपा  सन्देश तो आप  सब  समझ  ही गए  होंगे तो इस लिए  जब  भी  आप मोबाइल मैं गेम  या फिर  कोइ website इस्तेमाल कर  रहे  हो और आपके  किसी जानने वाले का कॉल आ  जाए तो उसे उठा  लीजिये क्या पता  वो भी  कही  घायल  पड़ा  हो और उसे भी  आपकी  मदद  की ज़रुरत  हो और उसकी वो कॉल आखिरी  बनने  से बच  जाए 

Short story challenge हेतु लिखी  कहानी  

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9 Comments

Shnaya

02-Jun-2022 04:40 PM

👏👌

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Neelam josi

21-May-2022 03:42 PM

Very nice 👌

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Seema Priyadarshini sahay

19-May-2022 05:52 PM

सचमुच बहुत ही सटीक

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