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वो पेंटिंग

भाग ५



संजय तरु ओर जिया को लेकर डॉक्टर विपिन के क्लीनिक पहुंचे उनसे पहले तीन चार मरीज ओर थे उनके बाद तीनों अंदर गए ।
कैसी हो जिया बेटा ???
आई एम फाइन अंकल 😊
आप कैसे हो ओर आपने मुझे यहां क्यू बुलाया है मै तो बीमार भी नहीं हु
पता नहीं ममा आज कल मेरी ही चिंता करती रहती हैं

ओह गुड़िया रानी तुमको कुछ नहीं हुआ है बस हमें आपसे कुछ बाते जाननी है वो आप हमें बताओगी ना ,,
बड़े प्यार से डॉक्टर विपिन ने जिया से कहा ।।
हा जी अंकल बस इतना ही बोली जिया .....
जिया को हिप्नोटाइज कर के इसके मन में दबी बातो को बाहर निकाल ना होगा ।
मगर डॉक्टर इस से जिया को कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना पूछा तरु ने ,
नहीं अब साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है तो सब कुछ ज्यादा पेचीदा नहीं होता नहीं तो पहले ये हमारे देश के
साधु बाबा भी किया करते थे मगर लोग इसे परहित में कम स्वार्थ में ज्यादा प्रयोग करने लगे थे ।
हमारे दो मन होते हैं एक चेतन मन ओर दूसरा अवचेतन मन ,,,
हमे चेतन मन में हमारे रोज की बाते ,काम करना ,
बात करना आदि सब है
ओर अवचेतन मन में वो जो कुछ हम सपनों में देखते हैं
उसे महसूस तो करते हैं परन्तु बाद में भूल जाते हैं कभी कभी हमारे मन में ऐसी कोई बात रह जाती है जिसे हम ऊपर से तो भूल चुके हैं मगर हमारे अवचेतन मन में वो
दबी रहती हैं और थोड़ा सा कुरेदने पर बाहर आ जाती हैं । ठीक है विपिन अब सब कुछ तुम्हारे उपर है
बस इस गुत्थी को सुलझा दो ,संजय ने एक मजबूत पिता की भांति कहा ।
चलो अब शुरू करते हैं भगवान ने चाहा तो सब ठीक होगा ।
डॉक्टर विपिन ने जिया को चेयर पर आराम से सिर टिका कर बैठने को कहा .......जिया बेटा अपनी आंखे बंद करो और याद करने की कोशिश करो
तुम कोन हो ,,,,जिया अचानक जोर जोर हसने लगी
क्या अंकल आपको नहीं पता मै कोन हूं??
मै तो जिया हूं ना
हा बेटा पता है आप एक बार ओर बता दो ।।।
जिया को डॉक्टर ने हिप्नोटाइज करना शुरू किया धीरे धीरे उसको एक दिन,चार दिन,  एक साल पाच साल ओर अंत में पिछले जन्म में जिया को लेकर गए।

***
एक घर उस घर में एक अधेड़ उम्र की महिला बैठी
चरखा चला रही थी और साथ में कुछ गुनगुना भी रही थी तब ही कोई पद्रह साल की लड़की उस महिला के लिए  गिलास में चाय ले कर आती हैं और बोलती है अम्मा अब काहे तुम ये चरखा लिए बैठ जाती हो
पहले ही कितो काम करी आती हो दूसरन के घरों में ।
अहों बिटिया ,,, वतो अपनी मजबूरी हती
ओर ये तो हम तेरे लाने बुन रहे हैं .
अम्मा हमें भी अपने लाने ले जाया करो ना ,हमे एहा
डर लगत करे हतो अकेले ..…...
ओर जिया ने अचानक घबरा कर अपनी आंखे खोल दी

क्रमशः........


@ रेणु सिंह " राधे " ✍️

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6 Comments

Seema Priyadarshini sahay

06-Dec-2021 06:00 PM

बहुत ही बढ़िया खूब लिखा।

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Chirag chirag

02-Dec-2021 09:10 PM

बहुत खूबसूरत

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Fauzi kashaf

02-Dec-2021 10:10 AM

Good

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