Gunjan Kamal

लाइब्रेरी में जोड़ें

अधूरे जज़्बात भाग :- २७ " तीसरी डेट "

                 भाग :- २७  " तीसरी डेट " 


गतांक से आगे 👇


              मैं  दिल ही दिल में अरण्या को चाहता हूॅं और स्वप्न में ना जाने कितनी बार उससे अपने जज्बातों को कह चुका हूॅं  लेकिन जैसे ही वह सामने आती है  दिल की बात अधरों तक  आती ही नहीं । कहीं अधर में ही रह जाती है । ऐसे में बिना कुछ उससे बोले अपने जज्‍बातों को कैसे बयां करूंगा ? मेरा  दिल इस बात की गवाही पहले ही  दे चुका है कि मुझे आपसे  प्यार है‌  और आपको मुझसे तो फिर ऐसे में  शरमाना कैसा ?  आज आपसे अपने प्यार का इजहार करने में कोई कसर नहीं छोडूंगा ।' सुजाॅय ने तैयार होते हुए अपने आप से कहा ।

क्यों न  अरण्या जी के लिए  फूलों का   गुलदस्ता लें लूं ? मन में सोचते हुए सुजाॅय के कदम अनायास ही फूलों की दुकान की तरफ बढ़ने लगे । मुहब्बत का पैगाम माने जाने लाल गुलाबों का गुलदस्ता  अपने हाथों में लिए  सुजाॅय रोज की तरह  स्वप्न की दुनिया में चला गया होता  अगर उसके साथ आएं मनोज ने उसे झकझोरा ना होता ।

' आई. लव. यू का  एक नोट इन गुलदस्तों पर लगाते ही  सोने पर सुहागा वाली बात हो जाएगी ।' मनोज ने सुजाॅय से कहा ।

' ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि  आज मैं अपने दिल की बात इस गिटार के माध्यम से अरण्या जी के  दिल तक पहुंचाऊंगा । मैंने उनसे वादा किया था कि अपनी तीसरी डेट पर मैं उनके सामने गाना गाऊंगा और इस तरह  अपने  दिल की भावनाओं को अपने प्यार तक पहुॅंचाने का प्रयत्न करूंगा ।'     सुजाॅय ने मुस्कराते हुए कहा ।

' मैंने सुना है आशिक से बड़ा शायर और कोई नहीं । कई बार कागज पर जज्‍बातों को उतार पाना लबों पर लाने के मुक़ाबले आसान होता है । अपने दिल के जज्बातों को उनके दिल तक पहुॅंचाने का यह तरीका सबसे सरल हैं और मुझे यकीन है कि मेरी भाभी और तुम्हारी अरण्या जी को तुम्हारा यह अंदाज जरूर पसंद आएगा ।  बहुत ज्‍यादा मत सोचो और यह भी नहीं सोचों कि कैसे लिखें और क्या लिखें ?  तुम तो बस अपने दिल में  बहने वाली  " प्रेम सरिता " को रोशनी बनाकर उसे अपने कलम के जरिए इन कोरे कागज पर  उतार दो ।'   मनोज ने सुजाॅय को समझाते हुए कहा ।

कल रात जिस कविता का वाचन सुजाॅय ने अरण्या के सामने स्वप्न में किया था , आज अभी  वह उन्हीं दिल से निकलें अल्फाजों को कोरे रंगीन कागज पर उतारने लगा

" मुझे आप सिर्फ  अपना बना लीजिए
  मुझें अपनी सांसों में बसा लीजिए
   अपने जज्बात  बना  लीजिए
   मुझे अपने सीने से लगा लीजिए ।

मुझे अपना अल्फाज़ बना लीजिए
अपने दिल की आवाज़ बना लीजिए
बसा लीजिए  इस कदर अपनी आँखों में
मुझे अपना ख़्वाब बना लीजिए ।

मुझे छुपा लीजिए सारी दुनियां  से‌  इस तरह
औरों के लिए एक गहरा राज बना लीजिए
बन जाइए  सिर्फ  मेरी मोहब्बत और
मुझे अपना महबूब  बना   लीजिए ।

मुझे अपने हर दर्द का हमदर्द बना लीजिए
दिल में ना सही  ख्यालों में ही  बैठा लीजिए
सपनों में ना सही  ऑंखों में सजा लीजिए
अपना एक सच्चा जज़्बात  बना लीजिए ।

मुझे कुछ इस तरह से अपना लीजिए
अपने दिल की धड़कन बना लीजिए
मुझसे कीजिए  मोहब्बत इतनी
अपनी हर एक चाहत का अंजाम बना लीजिए ।

ढॅंक लीजिए  मुझे अपनी जुल्फों से इस तरह
मुझे  ही  अपना संसार बना  लीजिए
आप फूल बन जाओ मुझे भंवरा बना लीजिए
आप चांदनी बन जाओ मुझे अपना चाँद बना लीजिए ।

रख दीजिए अपना हाथ मेरे हाथों में
कदम से कदम  मिला चलें  हम
इस  तरह  कि  मुझे  अपने
जीवन का हमसफर बना लीजिए   ।

शाम का सुहावना मौसम , हौले-हौले सी चलती बयार , दिल में जज्बातों का तूफान , ऑंखो में तैरते भविष्य के सुनहरे स्वप्न और हाथ में गिटार लिए सुजाॅय अपनी मनपसंद बाइक जों उसके डैडी ने कुछ दिन पहले ही उसे दिलाई थी , से उतर कर अरण्या के सरकारी क्वार्टर में लगे काॅलबेल को बजा रहा था

मनोज अपने जिगरी दोस्त सुजाॅय के साथ तो आया था लेकिन वह कबाव में हड्डी नहीं बनना चाहता था इसलिए वह अरण्या के क्वार्टर के सामने चाय की टेपरी में बैठ कर सुजाॅय का इंतजार कर रहा था

काॅलबेल की घंटी तो सुजाॅय के हाथ ने बजाई थी लेकिन उसकी सिहरन पूरे शरीर को हों रही थी घंटी की आवाज की जगह उसे अपने दिल की धक - धक स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ रही थी

काॅलबेल बजने के बाद "आ रही हूॅं " शब्दों की मिठास सुजाॅय के कानों में मिस्री की तरह घुल रही थी दरवाजा खुलने के साथ उसकी घबराहट इतनी बढ़ गई कि अपने हाथों में पकड़े लाल गुलाब के गुलदस्ते को उसने पीछे कर लिया ताकि अरण्या उसे देख नहीं सकें

' आप यहाॅं पर और इस  वक्त ?' अरण्या ने आश्चर्य से सुजाॅय को देखते हुए कहा

' जी ....मैं ... आपकी .. इजाजत हो ... तों .. क्या .. मैं ... अंदर .. ... सकता .. हूॅं ... ।'        सुजाॅय ने लगभग हकलाते हुए कहा

' आइए ।' अरण्या ने एक तरफ खड़े होकर कहा

कमरे में दाखिल होते ही सुजाॅय ने चारों तरफ नजरें दौड़ाई कमरे की हालत ने अरण्या की हैसियत को स्पष्ट रूप से बिन कहें ही बयां कर दिया था

बातों का सिलसिला बढ़ाने के लिए सुजाॅय ने कहा :-
" आपका घर तों बहुत ही सुन्दर है ।"

' ऐसा पहली बार हो रहा है कि मेरे कानों ने इस घर के सुंदर होने की बात सुनी है ।'  अरण्या ने मुस्कराते हुए कहा

' मै सच कह रहा हूॅं मेरी नजर से जों कोई भी देखेगा उसे यह खुबसूरत ही दिखाई देगा ।' सुजाॅय ने कहा

' छोड़िए इन  फालतू बातों को आप बैठिए ! मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूॅं अरण्या ने कहा

अरण्या के  टेबल पर पानी रखते ही सुजाॅय ने पानी का गिलास उठाया और एक ही बार में गटागट पी गया

' आपके घर के पीछे बालकनी तो होगी ना ?' सुजाॅय ने अरण्या से पूछा

' हाॅं है लेकिन आप क्यों पूछ रहे है ?' अरण्या ने सुजाॅय की तरफ देखते हुए आश्चर्य से जवाब देने के साथ सवाल भी पूछ लिया

' आपको मुझ पर भरोसा तो है ना मिस अरण्या ?'
सुजाॅय ने जवाब देने की बजाय सवाल ही पूछ लिया

' जी ! भरोसा तो है लेकिन ... अरण्या के आगे बोलने से पहले ही सुजाॅय बोल पड़ा :- " आप निश्चिंत होकर बैठी रहें और सब-कुछ मेरे पर छोड़ दे और यकीन माने मैं आपके भरोसे को टूटने नहीं दूंगा ।"

सुजाॅय ने मनोज को मैसेज कर दिया और अरण्या से पूछ कर बालकनी का दरवाजा खुला छोड़ दिया

' मुझे चाय नहीं पिलाएंगी आप ?'            सुजाॅय ने अरण्या की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर कहा

' मैं चाय बनाकर लाती हूॅं तब तक आप बैठिए ।'
अरण्या ने किचन की तरफ जाने से पहले कहा

आधे घंटे तक सुजाॅय ने अरण्या को इधर - उधर की बातों में उलझाए रखा उसने अरण्या को पहले ही बता दिया था कि अपने वादे के मुताबिक आज वह उसके साथ तीसरी डेट पर जाना चाहता है जिसका उसने उसके ही घर के बालकनी में अरेंजमेंट करवाया है

आधे घंटे बाद मनोज का मैसेज पढ़ते ही सुजाॅय के होंठों पर मुस्कान  तैरने लगी अरण्या का हाथ पकड़ उसने उसे कुर्सी से उठाया और उसकी ऑंखो में सफेद रेशमी पट्टी बांध दी और उसका हाथ पकड़ उसे बालकनी की तरफ लेकर जाने गया बालकनी में जाकर सुजाॅय ने अरण्या के ऑंखो पर बंधी पट्टी खोल दी

अरण्या ने देखा कि चारों तरफ बल्व की दूधिया रोशनी जगमगा रही हैं दो कुर्सियों के बीच रखी टेबल पर कैंडल लाइट डिनर का आयोजन किया हुआ है मद्धिम रोशनी के बीच मोमबत्ती की हिलती लौ साथ ही मद्धम - मद्धम गाने की धुन उस जगह को और भी रोमांटिक बना रहे थे

अपनी होने वाली पत्नी  के साथ कैंडल लाइट डिनर  और अपने दिल के जज़्बात  कहने का इससे रुमानी अंदाज और माहौल वह भी उन्हीं के  घर की बालकनी में  शायद ही किसी ने किया हो । अपने दिल की बात को जाहिर करने में यह माहौल बिल्कुल सही  रहेगा और हो सकता है कि अरण्या जी  खुद ही मोमबत्ती की हिलती - डुलती लौ में मेरी ऑंखों में छुपे मेरे दिल  का हाल  खुद -  ब -  खुद जान और समझ  ले‌ं ।'   सुजाॅय  ने मन ही मन में कहा

क्रमशः

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

   13
4 Comments

Chirag chirag

02-Dec-2021 09:22 PM

Nice part

Reply

Zaifi khan

30-Nov-2021 06:16 PM

Nice

Reply

Ammar khan

30-Nov-2021 11:35 AM

Awesome

Reply