Gunjan Kamal

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अधूरे जज़्बात भाग :- २६ " स्वप्न और सच्चाई जज्बातों भरी " "

                       भाग :- २६ " स्वप्न और सच्चाई जज्बातों भरी " 


गतांक से आगे 👇


हम जिसे प्यार करते है वह भी हमे प्यार करने लगी है , कानो को यह सुनकर कितना अच्छा महसूस होता है इसकी अनुभूति आज दिल पहली बार कर रहा है
यह दिल तो सिर्फ कहने के लिए मेरे सीने में धड़कता है  , अब तो इसे आपने चुरा लिया है अरण्या जी आखिरकार मेरे जज्बातों ने आपके दिल में अपना घर बना ही लिया आप सोच नहीं सकती आज के दिन मैं कितना खुश हूॅं ?  काश ! मुझे पंख लगे होते और मैं आपके पास उड़ कर चला आता अरण्या जी सिर्फ एक रात की दूरी है , अगली सुबह हमारी होगी कल हम दोनों एक-दूसरे को अपने - अपने जज्बातों से रू-ब-रू कराएंगे यें वह पल होगा जहाॅं सिर्फ हम होंगे , हमारे एहसास होंगे और साथ ही हमारे एक-दूजे के लिए उमड़ते जज़्बात कल का दिन मेरी जिंदगी का खुबसूरत और बेहतरीन दिन होगा जिसे मैं ताउम्र भूलकर भी भूल नहीं पाऊंगा कल सिर्फ मैं और आप .... ।'    सोचते हुए सुजाॅय ने शर्म से अपनी ऑंखें बंद कर ली

" मुझे आप सिर्फ  अपना बना लीजिए
  मुझें अपनी सांसों में बसा लीजिए
   अपने जज्बात  बना  लीजिए
   मुझे अपने सीने से लगा लीजिए ।

मुझे अपना अल्फाज़ बना लीजिए
अपने दिल की आवाज़ बना लीजिए
बसा लीजिए  इस कदर अपनी आँखों में
मुझे अपना ख़्वाब बना लीजिए ।

मुझे छुपा लीजिए सारी दुनियां  से‌  इस तरह
औरों के लिए एक गहरा राज बना लीजिए
बन जाइए  सिर्फ  मेरी मोहब्बत और
मुझे अपना महबूब  बना   लीजिए ।

मुझे अपने हर दर्द का हमदर्द बना लीजिए
दिल में ना सही  ख्यालों में ही  बैठा लीजिए
सपनों में ना सही  ऑंखों में सजा लीजिए
अपना एक सच्चा जज़्बात  बना लीजिए ।

मुझे कुछ इस तरह से अपना लीजिए
अपने दिल की धड़कन बना लीजिए
मुझसे कीजिए  मोहब्बत इतनी
अपनी हर एक चाहत का अंजाम बना लीजिए ।

ढॅंक लीजिए  मुझे अपनी जुल्फों से इस तरह
मुझे  ही  अपना संसार बना  लीजिए
आप फूल बन जाओ मुझे भंवरा बना लीजिए
आप चांदनी बन जाओ मुझे अपना चाँद बना लीजिए ।

रख दीजिए अपना हाथ मेरे हाथों में
कदम से कदम  मिला चलें  हम
इस  तरह  कि  मुझे  अपने
जीवन का हमसफर बना लीजिए   ।

अभी तों आप यहीं पर थी अरण्या जी । इतनी जल्दी कहाॅं गायब हो गई ? '  सुजाॅय ने चारों तरफ देखते हुए कहा ।

सुजाॅय कुछ देर तक अरण्या को अपने कमरे में ढूॅंढ़ता रहा । जब काफी देर तक अरण्या उसे  नहीं दिखी तों वह अनायास ही अपनी हालत पर मुस्कुरा उठा ।

' आपसे मिलने की बेकरारी इतनी है कि मैं कल का इंतजार भी नहीं कर पा रहा हूॅं । आपको अपने पास महसूस कर मैंने अपने दिल के जज़्बात आपके सामने कविता के माध्यम से रख दिया । काश ! इस पल आप मेरे सामने होती । मैं अपने दिल में बसी आपकी छवि से आपको मिलवाता । आप भी मेरा प्यार और अपने प्रति मेरे जज्बातों को देखकर और सुनकर भावविभोर हो उठती और मुझे गले लगा लेती लेकिन कोई बात नही कल भी मेरे प्यार और मेरे जज़्बात को सुनकर आप पर यह असर होगा कि  आप  मुझे गले लगाने के लिए मजबूर हो  जाएंगी और उसके बाद आप हमेशा  के लिए  मेरी  हों जाएंगी ।'       सुजाॅय द्वारा खुद से कहें गए ये शब्द अरण्या के प्रति उसके सच्चे जज्बातों को बयां कर रहे थे

इधर शिविका जबसे सुजाॅय से मिलकर आई थी ईश्वर से सिर्फ एक ही प्रार्थना कर रही थी ।

' हे ईश्वर ! कुछ ऐसा चमत्कार कर जिससे कि अरण्या और सुजाॅय की जिंदगी में खुशियां ही खुशियां जाएं उन दोनों को अपना - अपना प्यार मिलें और मुझे दो प्यार करने वालों को मिलवाने का सुकून ।' 

शिविका अपने कमरे में पलंग पर बैठ ईश्वर से प्रार्थना कर ही रही होती है कि उसके पापा उसके पास आकर पलंग पर ही बैठ जाते है बहुत दिनों बाद शिविका के कमरे में उसके पापा का आना हुआ था अपने पापा को यूं अपने समीप बैठ कर उसके सिर पर हाथ फेरते देख शिविका अपने आप को रोक नहीं पाई और अपने पापा के गले लग गई

' अभी तेरी विदाई में लगभग एक महीना है और तुम अभी से ही रो रही हों ?' शिविका के पिता ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा

' विदाई के समय ही लड़कियां अपने पापा के गले लग कर रोती है , ऐसा किस किताब में लिखा हुआ है पापा ? अब मैं अपने पापा के गले लगकर रो भी नहीं सकती ?शिविका ने शिकायत नजरों से अपने पिता की तरफ देखते हुए कहा

' तेरा पापा हमेशा तेरा सबल बन तेरे साथ खड़ा होगा मेरी बेटी तुम्हें किसी भी चीज की कमी नहीं होगी मेरी बेटी को ससुराल में हर वह चीज नसीब होगी जिसकी वह हकदार हैं तेरे जैसे ससुराल की तमन्ना हर उस लड़की की होती हैं जिसकी शादी होने वाली होती हैं या जों अच्छे घर और अच्छे वर ( दुल्हा ) की चाहत अपने दिल में रखती आई है तेरी दोस्त है ना वह .... क्या नाम है उसका  ..... ??? हाॅं अरण्या उस लड़की को तो तेरा जैसा ससुराल सात जन्मों में भी नसीब नहीं होगा मुझे तो वह लड़की बचपन से ही पसंद नहीं है लेकिन एक तुम हो कि उस जैसी स्टैंडर्ड लो लड़की को अपना दोस्त मानती आई हो ना जाने उसने और उसके परिवार ने तुम पर कैसा जादू कर दिया है कि तुम उसकी दोस्ती को खोना नहीं चाहती उस लड़की का वश चले तों वह तुम्हारी खुशियां भी तुमसे छीन लेंशिविका के पिता ने कहा

' पापा ! अरण्या ऐसी लड़की नहीं है जैसा आप उसे समझते रहें हैं बचपन से लेकर आज तक मेरी एकलौती वही दोस्त रही है इसके पीछे भी वजह है :- " वह मुझे समझती है , मेरी  ऑंखों  को पढ़ लेती है वो जो चीज मेरे लिए सही है उसका चयन वह मुझसे पहले ही कर देती है बहुत प्यार करती है वह
मुझसे पापा मेरे साथ वह हॅंसी हैं , रोई है यहाॅं तक कि उसने आपकी डाॅंट भी खाई है लेकिन किसी भी परिस्थिति में उसने मेरा साथ नही छोड़ा मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रास्ता दिखाने वाली वही है आप तों महीनों बिजनेस के सिलसिले में घर से दूर रहते थे मैं आपसे मिलने के लिए रोती थी लेकिन आप नहीं आते थे आती थी वह लड़की जिसे आप स्टैंडर्ड लो की लड़की कह उसकी बेइज्जती कर रहें हैं आपके लिए वह ऐसी लड़की होगी लेकिन मेरे दिल में उसके लिए ऐसी भावना ना तों पहले ही कभी थी और ना ही आपके कहने के बावजूद आगे होगी हम दोनों हमेशा ही बेस्ट फ्रेंड रहेंगी '     शिविका ने अपने पापा से कहा

' बेटा ! छोड़ो उसकी बात हम अभी सुजाॅय और उसके परिवार की बातें करते हैं सुजाॅय के पिता का आज भी फोन आया था मेरी इच्छा के साथ - साथ उनकी भी यही इच्छा है कि तुम दोनों की शादी जल्द - से - जल्द हों जाएं वह तुम्हें अपने घर की बहू बनाना चाहते हैं और मैं भी यही चाहता हूॅं कि तुम दुल्हन बनकर उनके घर में जाओ और अपने प्यार - व्यवहार से उनका दिल जीतों। '      सुजाॅय के पिता ने कहा

' पापा ! दुल्हन बनकर जल्द ही उस घर में और सुजाॅय की जिंदगी में मैं नही बल्कि अरण्या जाएगी और अपने प्यार - व्यवहार से मैं उन सबका दिल नहीं जीतूंगी बल्कि अरण्या जीतेगी ।'  मन में सोचते हुए शिविका के चेहरे पर हल्की मुस्कान छा गई

अपनी बेटी को यूं मुस्कुराते हुए देखकर शिविका के पिता के दिल को सुकून मिल रहा था । आज इतने दिनों बाद वह अपनी बेटी के मन की बात ही तों जानने आए थे और यह जानकर उन्हें अपार हर्ष की अनुभूति हो रही थी कि उनकी पसंद कुछ ही दिनों में उनकी बेटी की भी पसंद बन चुकी है

अपने क्वार्टर में चहलकदमी करती अरण्या शिविका के बारे में सोच रही थी

' जहाॅं तक मेरी ऑंखों ने शिविका की ऑंखो में देख कर यह समझा है कि उसे भी सुजाॅय से उतना ही लगाव हों चुका है जितना कि वह मुझसे रखती आई है यह लगाव ही तो प्यार की पहली सीढ़ी होती है जों उसकी ऑंखो में साफ-साफ झलकती है उसकी ऑंखो में सुजाॅय  के प्रति यही लगाव देखकर ही तों मैंने उससे  सुजाॅय के प्रति अपने प्यार की बातें कही थी कही थी कि मुझे भी उससे प्यार हों गया है जो कि कभी भी सच नहीं हो सकता क्योंकि मेरा प्यार तों मेरा सपना है और इसे मैं कैसे भी करके हासिल करके रहुंगी मुझे यहाॅं किसी बड़े घर की बहू और सुजाॅय की पत्नी बनकर नहीं रहना बल्कि विदेशी धरती पर जाकर अपने डाॅक्टर बनने के स्वप्न को पूरा करना है और अपने देश का नाम ऊॅंचा करना हैशिबू ! तुम बस देखती जाओ जैसे आज तक तुम्हें समझने में मैंने कोई गलती नहीं की वैसे ही आज भी मैंने तुम्हारी ऑंखो में सुजाॅय के लिए प्यार देखा है । अपने प्यार को तुम मेरी खुशी के लिए कुर्बान करने चली थी जो कि मैं किसी भी हालत  में  होने  नहीं दूंगी । इन रईसों की  दुनियां को मैं तुमसे अधिक जानती हूॅं । मुझ जैसी गरीब लड़की को यह रईसो की  दुनियां कभी भी ना तों अपने दिल में ही जगह दे सकती है और ना ही अपने आलीशान बंगले में । मेरी जगह वहाॅं नहीं है बल्कि उस जगह की असली हकदार सिर्फ तुम हों और कोई नहीं , मैं तो बिल्कुल भी नहीं ।'      अरण्या ने अपने आप से कहा


क्रमशः


" गुॅंजनकमल " 💗💞💓

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4 Comments

Chirag chirag

02-Dec-2021 09:21 PM

Very nyce

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Shalini Sharma

22-Sep-2021 11:52 PM

Beautiful story

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इंटरेस्टिंग स्टोरी...

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Gunjan Kamal

15-Sep-2021 06:42 PM

जी

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