दुर्मिल सवैया

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दुर्मिल सवैया मापनी- 112 112 112 112, 112 112 112 112 हरिराम कहो हरिनाथ कहो शिवनाथ कहो रघुनंदन को। प्रिय धाम वही रचते रहते तुम देख सदा प्रिय नंदन को। अति ...

अध्याय

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