ताल- तलैया रीते.!

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विषय:-- स्वैच्छिक "ताल- तलैया रीते.!" रात -दिन पानी बरसा,  फिर भी ताल-तलैया रीते,। फट जाती चादर जीवन की, जब-जब उसको सीते।। सावन ने खूब कमाया, फिर भी घर है खाली। पतझर ...

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