हरिहरपुरी की कुण्डलिया

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हरिहरपुरी की कुण्डलिया आता है शुभ पंथ से, लेता पकड़ कुपंथ। रामचरित पढ़ता नहीं, रचने लगत  कुग्रन्थ।। रचने लगत कुग्रन्थ,गलत राही बन चलता। छोड़ रतन अनमोल, कोयला प्रति क्षण बिनता।। कहें ...

अध्याय

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