कलम लिए फिरता हूं- KALAM LIYE FIRTA HUN-best hindi Ghazal by ℕ 𝕂𝕦𝕞𝕒𝕣

81 भाग

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न कोई तलवार न मैं, बम लिए फिरता हूं। मैं तो एक शायर हूं, कलम लिए फिरता हूं। जिस्म पर हजारों हैं, अपनो के दिए जख्म, बस इसलिए पास में, मरहम ...

अध्याय

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