सहर्ष स्वीकारा है

23 भाग

9 बार पढा गया

2 पसंद किया गया

सहर्ष स्वीकारा है / गजानन माधव मुक्तिबोध ज़िन्दगी में जो कुछ है, जो भी है सहर्ष स्वीकारा है; इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है वह तुम्हें प्यारा है। गरबीली ग़रीबी ...

अध्याय

×