सूरदास सफ़रनामा

208 भाग

45 बार पढा गया

3 पसंद किया गया

ऊधौ,तुम हो अति बड़भागी ऊधौ,तुम हो अति बड़भागी. अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी. पुरइनि पात रहत जल भीतर,ता रस देह न दागी. ज्यों जल मांह तेल की गागरि,बूँद ...

अध्याय

×